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विश्व जल दिवस: भूजल-अदृश्य को दृश्यमान बनाना!

जल है तो कल है
मीठे पानी के महत्व और इसके संसाधनों के स्थायी प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से हर वर्ष २२ मार्च को दुनिया भर में विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इस साल २०२२ में वर्ल्ड वॉटर डे २२ मार्च को मंगलवार के दिन मनाया जा रहा है। इसका मुख्य फोकस सतत विकास लक्ष्य पाने के लिए २०३० तक सभी के लिए पानी और स्वच्छता के समर्थन में वैश्विक जल संकट से निपटने के लिए कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करना है। जीव-जंतु हो या मनुष्य इस धरती पर जीवित रहने के लिए स्वच्छ पानी सभी के लिए जरूरी है। परंतु मानवीय हस्तक्षेप के कारण आज जिस तरह से शुद्ध जल का संकट संपूर्ण पृथ्वी पर मंडरा रहा है, ऐसे में मनुष्यों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ने की पूरी संभावना है।

कब हुई शुरुआत?
स्वच्छ जल संरक्षण और इसके महत्व के बारे में आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल २२ मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इसकी पहल वर्ष १९९२ में ब्राजील के रियो डी जनेरियो शहर में आयोजित हुए पर्यावरण एवं विकास पर केंद्रित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। उसी वर्ष २२ दिसंबर १९९२ को, संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ल्ड वाटर डे मनाने का निर्णय लिया गया, जिसके बाद २२ मार्च १९९३ को पहली बार जल दिवस मनाया गया। बता दें कि २०१० में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ‘सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल एवं स्वच्छता के अधिकार’ को एक मानव अधिकार के रूप में मान्यता दी है।
क्यों मनाते हैं?
विश्व जल दिवस स्वच्छ पानी के संकट से निपटने के लिए कार्रवाई करने के बारे में है। आज २ अरब लोग मल से दूषित पेयजल के स्रोत का उपयोग करते हैं, जिससे उन्हें हैजा, पेचिश, टाइफाइड और पोलियो होने का खतरा होता है। इसे मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य जल के महत्व तथा जल की आवश्यकता एवं संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक करना है।
पृथ्वी पर तेजी से घटते जलाशयों और लुप्त होते पीने योग्य पानी के स्रोतों को देखते हुए आज जल संकट एक बड़ा मुद्दा बन गया है, ऐसे में लोगों की बढ़ती जनसंख्या को ध्यान में रखें तो शुद्ध जल की उपलब्धता को हर इंसान तक पहुंचाना काफी मुश्किल होता जा रहा है।
जल संरक्षण के उपाय?
जन-जन में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता पैâलाई जाए और उन्हें जल संचय के बारे में भी बताया जाए। नहाते समय शावर या बाथटब को इस्तेमाल करने की बजाय बाल्टी में पानी भरकर स्नान किया जाए, जिससे पानी बचाया जा सके। ब्रश करते समय, दाढ़ी बनाते समय या फिर हाथ धोते समय आवश्यकता न पड़ने पर नल को बंद कर दें।
पहले बरसात का पानी तालाबों और जलाशयों में एकत्रित हो जाता था, जिसका इस्तेमाल बाद में किया जाता था लेकिन आज तालाबों की कमी है, ऐसे में जल संरक्षण के लिए पुन: तालाब और जलाशयों का निर्माण किया जाए, जिससे भू अंतर्गत जल का स्तर भी तेजी से बढ़ेगा।
सार्वजनिक जगहों जैसे पार्कों, अस्पतालों, मंदिरों और स्कूलों में लगी नल की टोंटियां अधिकतर खराब ही पाई जाती हैं, ऐसे में हम इन खराब टोंटियों के चलते कई हजार लीटर पानी बर्बाद कर देते हैं, हमें इन नलों को पुन: मरम्मत कराकर इन्हें जल्द से जल्द ठीक कराना चाहिए जिससे पानी व्यर्थ न हो।
सरकार को यह ध्यान देना चाहिए कि कारखानों, नालियों और सीवर आदि का पानी नदियों के शुद्ध जल में न मिले। नदियों के पानी को भी पीने योग्य बनाया जाए।
पानी संरक्षण के लिए हमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे वर्षा के जल को एकत्रित किया जा सके। यह तकनीक अब तक की सबसे कारगर मानी जाने वाली टेक्नोलॉजी है, जिससे वर्षा के जल को काफी मात्रा में एकत्रित किया जा सकता है।
सरकारों को जल संरक्षण और जल व्यर्थ करने वालों पर सख्त कानून बनाने चाहिए।
पेड़ों की कटाई से धरती की नमी में लगातार कमी आ रही है, जिससे भूजल स्तर पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में हमें वृक्षारोपण करना चाहिए और लोगों को भी वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
जल दिवस का महत्व
मानव की उत्पत्ति के लिए पानी कितना जरूरी है, इसका अंदाजा आप इस बात से ही लगा सकते हैं कि अब दूसरें ग्रहों पर जीवन की तालाश के लिए पानी की खोज को प्राथमिकता दी जा रही हैं। अधिकांश संस्कृतियों का विकास भी नदी के किनारे बताया जाता है। लेकिन दुनिया में मौजूद पानी की मात्रा का केवल १ प्रतिशत या इससे भी कम पानी पीने के योग्य है। बाकी ९९ प्रतिशत पानी नदियों, महासागरों, झीलों और झरनों आदि के रूप में उपलब्ध है, जो या तो दूषित है या इतना खारा है कि उसे पीया नहीं जा सकता। आज पानी की कमी का मुख्य कारण पानी का अनावश्यक उपयोग ही है। अगर अब भी जल का संरक्षण नहीं किया गया तो पृथ्वी पर शुद्ध जल को लेकर बड़ा संकट आना निश्चित है क्योंकि जल है तो कल है।

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