मुख्यपृष्ठनए समाचारनिर्यात प्रतिबंध का घाव! प्याज आपको रुला देगा!

निर्यात प्रतिबंध का घाव! प्याज आपको रुला देगा!

हमारे देश के किसान दुनिया में सबसे दुर्भाग्यशाली और बेबस हैं, ऐसा कहना होगा। प्राकृतिक आपदाएं तो जैसे वे नसीब में लिखवाकर लाए हैं, लेकिन जिन शासकों को इन आपदाओं में मदद का हाथ बढ़ाना चाहिए था, वे अक्सर ऐन वक्त पर दगा दे देते हैं। किसान या तो प्रकृति की मार से कमजोर हो जाते हैं या फिर सरकार के अविवेकपूर्ण निर्णयों से परेशान हो जाते हैं। इस बार भी केंद्र सरकार के एक ऐसे ही पैâसले ने महाराष्ट्र के आम प्याज उत्पादक किसान को एक बार फिर संकट में डाल दिया है। सरकार ने प्याज के निर्यात पर जल्दबाजी में प्रतिबंध लगाकर किसानों और प्याज व्यापारियों दोनों के पैरों तले जमीन खिसका दी है। ऊपरी तौर पर प्रधानमंत्री मोदी किसानों के हितैषी होने का कितना भी दिखावा करें, लेकिन प्याज निर्यात प्रतिबंध से उनका किसान विरोधी चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है। महाराष्ट्र के साथ-साथ मध्य प्रदेश भी सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है। लेकिन मोदी सरकार ने प्याज निर्यात प्रतिबंध की कुल्हाड़ी विधानसभा चुनाव खत्म होने तक छिपाए रखी और जैसे ही नतीजे उनके पक्ष में आए, उन्होंने वही कुल्हाड़ी मध्य प्रदेश और देशभर के प्याज उत्पादक मतदाताओं के पैरों पर चला दी। ऐसा है भाजपा का कृषि प्रेम खोखला और निर्मम। तीन-चार महीने पहले मोदी सरकार ने प्याज पर निर्यात शुल्क ४० फीसदी बढ़ाकर प्याज उत्पादकों और व्यापारियों को झटका दिया था। बाद में आज तक के सर्वाधिक ८०० डॉलर प्रति टन निर्यात मूल्य लगाकर उनकी कमर तोड़ दी। इस बढ़ोतरी को कम करने की मांग की जा रही थी। इसे स्वीकार करना तो दूर, लेकिन मोदी सरकार ने सीधे प्याज निर्यात पर रोक लगाकर वार कर दिया और इसके विरोध में प्याज की नीलामी बंद करनेवाली बाजार समितियों और व्यापारियों की आवाज को दमन का डंडा चलाकर खामोश कर दिया गया। हमारे देश में आम किसान की कोई ‘आवाज’ ही नहीं है। उसकी पुकार भी कोई नहीं सुनता। इसलिए उनकी हालत ‘गूंगा बेचारा…’ जैसी हो गई है। और उसमें तीन दिन बाद नीलामी शुरू हुई तो प्याज की कीमत तुरंत एक से डेढ़ हजार रुपए गिर गई। अंतत: मार किसान को ही पड़ी। यानी अगर नीलामी बंद रहती तो प्याज सड़ने से किसान को नुकसान होता और नीलामी शुरू हुई तो भी कीमत गिरने से किसान को नुकसान हुआ। प्रधानमंत्री मोदी हमेशा कृषि में क्रांति लाने, किसानों की आय दोगुनी करने, कृषि उपज की गारंटी देने आदि का वादा करते हैं। लेकिन उनका शासन काल किसानों के सपनों पर ही नहीं उनके भविष्य पर भी पानी फेरने वाला रहा है। न तो किसानों की आय दोगुनी हुई, न ही मोदी ने कृषि उपज के दाम की गारंटी की ‘गारंटी’ पूरी की। इसके विपरीत जब-जब किसानों के हित में कोई निर्णय लेने का वक्त आता है, तब-तब मोदी सरकार ऐसी नीतियों को लागू कर देती है, ताकि किसानों की झोली में उनके अधिकार का कुछ न पड़े। प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध का पैâसला आम किसानों को मुश्किल में डाल रहा है। सत्तारूढ़ भाजपा को डर है कि प्याज के उत्पादन में गिरावट से प्याज की कीमतें बढ़ सकती हैं और उसे आगामी लोकसभा चुनावों में राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसीलिए तीन विधानसभा चुनावों में सफलता मिलते ही तुरंत प्याज निर्यात प्रतिबंध का पैâसला लिया गया। हालांकि, अब ऐसा कोई नहीं कह सकेगा कि ग्राहकों को ऊंची कीमत पर प्याज खरीदने के लिए मजबूर किया गया लेकिन उसके लिए हर बार गरीब किसान की ही जेब काटी जाए यह जरूरी नहीं। प्याज के सारे हालात को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार एक व्यापक प्याज नीति क्यों नहीं लागू करती जिससे न तो किसान को नुकसान होगा, न व्यापारी को घाटा उठाना पड़ेगा और न ही आम आदमी की जेब पर भार पड़ेगा? आप अपने राजनीतिक डर के चलते गरीब किसानों को कितनी दफा सूली पर चढ़ाते रहेंगे और क्यों? सूखे और खराब मौसम की मार से पहले ही आधे मर चुके प्याज उत्पादक किसान की तरफ मदद का हाथ बढ़ाने के बजाय, आप उसे प्याज निर्यात प्रतिबंध का जख्म क्यों दे रहे हो? महाराष्ट्र में सूखे के तीन महीने बीत जाने के बाद केंद्र की मोदी सरकार जागी है। उनकी निरीक्षण टीम मंगलवार को राज्य में पहुंची। अब वे वापस जाएंगे, अपनी रिपोर्ट देंगे, फिर वह केंद्र से राज्य के पास आएगी, राज्य सरकार उस पर निर्णय लेगी, प्रशासन उस पर अमल करेगा और बमुश्किल दो-तीन आंकड़ों का चेक ‘आर्थिक मदद’ के तौर पर सूखा पीड़ितों के हाथ में आएगा! खराब मौसम के चलते हुए नुकसान की भरपाई के पंचनामे की नौटंकी भी इसी तरह चल रही है। उस पर प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध ने किसानों के विश्वास को तोड़कर रख दिया है। प्रकृति और शासन देश के किसानों के लिए ‘एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई’ बन चुके हैं। हर तरफ से मरना किसानों को ही है। केंद्र और राज्य सरकार की हरकतों से प्याज उत्पादकों की आंखों में आंसू आ गए हैं, लेकिन यही प्याज कल आपको भी रुलाएगा, याद रखना!

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