मुख्यपृष्ठअपराधघाव : गलत रास्ता! सेहरे की चाह थी मिली सलाखें

घाव : गलत रास्ता! सेहरे की चाह थी मिली सलाखें

 फिरौती के लिए किया मासूम को अगवा
 मजदूर के बच्चे के बदले सुपरवाइजर से मांगा `५० हजार’ 
 अपहर्ता चौकीदार को पुलिस ने किया गिरफ्तार

  •  जितेंद्र मल्लाह

शादी का लड्डू खाने की चाहत हर शख्स अपने दिल में रखता है। विवाह योग्य उम्र होने के बाद लोग अपने होनेवाले जीवनसाथी को लेकर मन में अरमान सजाने लगते हैं। सिर पर सेहरा सजाने का ऐसा ही अरमान मालाड (प.) स्थित एक निर्माणाधीन इमारत में चौकीदारी करनेवाला २६ वर्षीय महेश सिंह भी सजा रहा था। धूमधाम से विवाह हो ऐसी ही मंशा मन-ही-मन वह भी रखता था लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे। फिर पैसों के लिए उसने गलत रास्ता चुन लिया, जिसकी वजह से सिर पर सेहरा सजने की जगह उसके हाथों में हथकड़ी लग गई और वह सलाखों के पीछे पहुंच गया। मालाड (प.) स्थित नाडियाडवाला कॉलोनी नंबर-१ स्थित निर्माणाधीन इमारत में काम करनेवाले मजदूर का ३ वर्षीय बच्चा मंगलवार की देर शाम अचानक लापता हो गया। सुरक्षा रक्षक केबिन के पास खेल रहा बच्चा जब काफी देर तक घर वापस नहीं लौटा तो मां-बाप ने उसे ढूंढ़ना शुरू किया लेकिन वह कहीं भी नजर नहीं आया। हालांकि उस दौरान इमारत का चौकीदार महेश सिंह (बदला हुआ नाम) भी जगह पर नहीं था इसलिए लोग सोच रहे थे कि महेश बच्चे को साथ ले गया होगा क्योंकि वह अक्सर बच्चों को चॉकलेट, बिस्किट दिलाता रहता था।
नहीं लौटा चौकीदार
मासूम के मजदूर मां-बाप एवं दूसरे लोगों के दिल की धड़कनें तब तेज हो  गईं , जब करीब दो घंटे बीतने के बाद भी महेश वापस नहीं लौटा। रात १० बजे इमारत के सुपरवाइजर को एक कॉल आया। कॉल महेश सिंह ने किया था। उसने बच्चे को अगवा करने की जानकारी दी और रिहाई के बदले सुपरवाइजर से ५० हजार रुपयों की मांग की थी। इस खुलासे के बाद इमारत में मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया था। अनिष्ट की आशंका से ग्रसित मां-बाप ने मासूम के गुमशुदगी की शिकायत मालाड पुलिस थाने में दर्ज कराई थी।
दोस्त के मोबाइल से मिला सुराग
डीसीपी विशाल ठाकुर के मार्गदर्शन व वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक धनंजय लिगाडे के नेतृत्व में मालाड पुलिस ने महेश के मोबाइल फोन की लोकेशन की मदद से मामले की जांच शुरू की लेकिन महेश का मोबाइल फोन लगातार बंद होने के कारण जांच ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि इस दौरान महेश अलग-अलग मोबाइल नंबरों से सुपरवाइजर को लगातार कॉल करके फिरौती के लिए धमकाता रहा। इसके बाद पुलिस महेश के यार-दोस्तों के बारे में जानकारी जुटाने लगी। पुलिस का ये प्रयास सफल हुआ। पुलिस को पता चला कि महेश का दोस्त सुरेश (काल्पनिक नाम) भी उसके साथ नाडियाडवाला कंपाउंड स्थित सुरक्षा रक्षक के कमरे में ही रहता था। सुरेश, दहिसर की किसी इमारत में सुरक्षा रक्षक का काम करता था। महेश की कॉल डिटेल से पुलिस को सुरेश का नंबर मिल गया। सुरेश का नंबर चालू था। पुलिस ने भी सुरेश संपर्क किया तो उसने कॉल पर स्वीकार कर लिया कि बच्चा व महेश उसके साथ ही हैं और वे लोग दहिसर जा रहे हैं। इसके बाद मालाड पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सुरेश के मोबाइल के लोकेशन के हिसाब से जाल बिछाया और दहिसर (प.) स्थित खडकपाड़ा इलाके से महेश को दबोच लिया। पुलिस की सूझबूझ से अपहृत मासूम १७ घंटे के अंदर सकुशल अपने माता-पिता के पास पहुंच गया।
विवाह के लिए चाहिए थे पैसे
महेश ने बताया कि उसकी शादी होनेवाली है। धूमधाम से शादी के लिए उसे पैसों की जरूरत थी। इसलिए उसने बच्चे के अपहरण की योजना बनाई। फिरौती की कॉल के लिए वह ऑटोरिक्शा चालकों एवं सब्जी विक्रेताओं से यह कहकर फोन लगवाता था कि उसका फोन खो गया है और उसे अर्जेंट कॉल करना है।

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