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वाह महाराज, मुर्दों का भी इलाज! ‘आयुष्मान भारत योजना’ में भारी घोटाला, कैग की रिपोर्ट में हुआ भयंकर खुलासा

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
कुछ साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े जोर-शोर से ‘प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना’ की शुरूआत की थी। पीएम बार-बार कहते हैं कि उनकी सरकार में भ्रष्टाचार का कोई दाग नहीं है, मगर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पीएम की इस योजना में भारी घोटाला सामने आया है। हालत इतनी खराब है कि इस योजना में मुर्दों का भी इलाज किया जा रहा है और इस नाम पर करोड़ों रुपए डकार लिए गए हैं। इस घोटाले का खुलासा वैâग की रिपोर्ट में हुआ है।
वैâग की रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत ऐसे मरीज भी लाभ उठा रहे हैं, जिन्हें पहले मृत दिखाया गया था। यहीं नहीं, इस योजना के ९ लाख से ज्यादा लाभार्थी तो सिर्फ एक ही मोबाइल नंबर से जुड़े हुए पाए गए हैं। ऑडिट में सबसे बड़ी खामी ये उजागर हुई है कि इस योजना के तहत ऐसे मरीज इलाज करा रहे हैं, जिन्हें पहले ‘मृत’ दिखाया गया था। मौत के मामलों के डेटा को एनालाइज करने से पता चला कि इस योजना के तहत उपचार के दौरान ८८,७६० रोगियों की मृत्यु हो गई। इन रोगियों के संबंध में नए इलाज से संबंधित कुल २,१४,९२३ दावों को सिस्टम में भुगतान के रूप में दिखाया गया है। ऑडिट रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि उपरोक्त दावों में शामिल करीब ३,९०३ मामलों में क्लेम की राशि का भुगतान अस्पतालों को किया गया। इनमें ३,४४६ मरीजों से संबंधित ६.९७ करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।
मोबाइल नंबर से रखा जाता है रिकॉर्ड
रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत लाखों लाभार्थी ऐसे हैं, जो एक ही मोबाइल नंबर पर रजिस्टर्ड हैं। इस सरकारी स्कीम के तहत लाभ पाने के लिए मोबाइल नंबर का रजिस्ट्रेशन सबसे जरूरी होता है। लाभार्थी द्वारा रजिस्टर कराए गए मोबाइल नंबर के जरिए ही उसका रिकॉर्ड तलाशा जाता है। यदि किसी लाभार्थी का मोबाइल नंबर गलत निकलता है तो लाभार्थी की पहचान करना मुश्किल हो जाता है और फिर योजना के दायरे में आने वाले अस्पताल इलाज देने से इनकार कर देते हैं। लेकिन यहीं बड़ी धांधली की गई है।
बड़ी चूक का इशारा
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह के दावों का सफल भुगतान राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों की ओर से अपेक्षित जांचों को सत्यापित किए बिना किया जाना बड़ी चूक की तरफ इशारा करता है। ऑडिट में डेटा एनालाइज करते हुए ये भी पता चला कि इस योजना के एक ही लाभार्थी को एक ही समय में कई अस्पतालों में भर्ती किया गया। जांच में पता चला कि कई ऐसे मामले सामने आए जहां किसी बच्चे का जन्म एक अस्पताल में होता है और मां की पीएमजेएवाई आईडी का उपयोग करके नवजात को देखभाल के लिए दूसरे अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया जाता है। जांच में सामने आया है कि डेटाबेस में ४८,३८७ मरीजों के ७८,३९६ दावे पाए गए, जिसमें पहले के इलाज के लिए इन मरीजों की छुट्टी की तारीख, उसी मरीज के दूसरे इलाज के लिए अस्पताल में एंट्री की तारीख के बाद की थी। ऐसे मरीजों में २३,६७० पुरुष मरीज शामिल हैं।

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