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सट्टेबाजी के शिकंजे में यार्न!

भिवंडी का वस्त्रोद्योग एक बार फिर पूरी तरह संकट में फंस गया है। सट्टेबाजारी के शिकंजे में होने के कारण यार्न का भाव दो माह में ३५ फीसदी बढ़ गया है, जबकि यार्न का भाव बढ़ने के बाद कपड़े की बिक्री घट गई है। कपड़ा उत्पाद में होनेवाले खर्च से कम दाम में बिक रहा है, जिसके कारण लूम व्यवसाइयों का हाल बेहाल हो गया है।

उल्लेखनीय है कि भिवंडी में तकरीबन छह लाख से अधिक पॉवरलूम चलते हैं। इसमें करीब साढ़े तीन लाख से अधिक मजदूर काम करते हैं। इसी पर यहां का हर छोटा-मोटा उद्योग आश्रित है। अनलॉक के बाद वस्त्रोद्योग में थोड़ी तेजी दिख रही थी, लेकिन मंदी आने से कपड़ा उद्योग की हालत काफी खराब हो गई है। क्योंकि यार्न की सट्टा बाजारी के कारण यार्न का भाव दो माह में ३५ प्रतिशत बढ़ चुका है। इसके कारण कपड़ा अंडर कास्ट बिक रहा है।

मालिकों का कहना है
एस.एफ. टेक्सटाइल्स के मालिक मौलाना तहजीब शफीक शेख ने बताया कि पहले जो यार्न २१० रुपए किलो बिकता था, अब वह २७० रुपए बिकने लगा है। उन्होंने बताया कि कॉटन यार्न में ६०-६० कार्डेफ पांच किलो का पहले १,०५० का था, जो अब बढ़कर १,३५० हो गया है। इसी तरह ६० कॉम्बेड १,२५० प्रति पांच किलो से बढ़कर १,५०० रुपए हो गया है। साथ ही ४० कार्डेड १९० रुपया प्रति किलो से बढ़कर २२० रुपए हो गया है। मौलाना तहजीब शेख ने बताया कि इसी तरह से हर क्वालिटी के भाव में ३५ प्रतिशत की बढ़ोत्तरी ने कपड़ा उत्पादन के कास्ट में वृद्धि कर दी है, जबकि कपड़े का भाव वही है, जो पहले था। वी.एल. टेक्सटाइल के मालिक श्रीनिवास वल्लाल व ए.ए. यार्न के मालिक दीपक सरावगी ने बताया कि यार्न का भाव बढ़ने से कपड़ा उत्पादन में खर्च बढ़ गया है, जिसके बाद कोई भी कपड़ा खरीदनेवाला व्यापारी यार्न का भाव बढ़ने के बाद कपड़े का भाव बढ़ाकर देने को तैयार नहीं है। नतीजा मजदूरों के रोजगार के कारण कपड़ा तैयार कर उसे स्टॉक में रखना पड़ रहा है। वह कब बिकेगा कहना मुश्किल हो गया है। प्रवीण टेक्सटाइल्स के मालिक प्रवीण गुप्ता का कहना है कि अब तो पैसा लगाकर कपड़ा तैयार करने के बाद उसकी बिक्री न होने से कमर टूट गई है। अब लूम बंद करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं दिख रहा है। बता दें कि भिवंडी में कुल छह लाख के आस-पास पावरलूम चलते हैं। लेकिन लॉकडाउन के बाद ७० फीसदी लूम ही चालू हो सके हैं।