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यह दौरा है या पिकनिक? समझौते पर हस्ताक्षर के लिए क्या ७० लोग लगते हैं?

सामना संवाददाता / मुंबई
‘घाती’ सरकार की ओर से जनता के पैसों की जबरदस्त बर्बादी चल रही है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अब दावोस दौरे पर जानेवाले हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों समेत कुल ७० लोगों का लाव-लश्कर उनके साथ होगा। मुख्यमंत्री के इस दौरे पर शिवसेना नेता व विधायक आदित्य ठाकरे ने जोरदार तरीके से तंज कसा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा है कि यह दौरा है या पिकनिक? एमओयू (समझौता पत्र) पर ७० लोगों के हस्ताक्षर की जरूरत होती है क्या?
उल्लेखनीय है कि १५ जनवरी से दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम हो रहा है, उसमें मुख्यमंत्री शिंदे समेत उद्योग मंत्री उदय सामंत और १० सदस्य प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। इस पर भी आदित्य ठाकरे ने निशाना साधा है। आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया नेटवर्विंâग साइट ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए इस संबंध में प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है कि महाराष्ट्र में अवैध सरकार के असंवैधानिक मुख्यमंत्री करीब 70 लोगों को साथ लेकर दावोस जा रहे हैं।
परिवार के व्यक्ति, पति, पत्नी साथ में हैं तो समझा जा सकता है, लेकिन कई के बच्चों को भी साथ ले जाया जा रहा है, जैसे की छुट्टी हो।
१० लोगों के प्रतिनिधिमंडल को मिली है मंजूरी
इस दौरे के लिए प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में केवल १० लोगों ने आवश्यक मंजूरी मांगी है, जबकि बाकियों को बिना आवेदन किए निजी यात्राओं पर ले जाया जा रहा है। इस दौरे में वर्तमान सांसदों, पूर्व सांसदों, निजी एजेंसियों के कुछ प्रचारकों, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के पीआर की एक टीम शामिल है।

उस जगह 70 लोग क्या करेंगे?
दावोस में केवल मुख्यमंत्री को ही समझौता करार पर हस्ताक्षर करना है। इसलिए केवल सरकार के प्रमुख और संबंधित अधिकारियों का ही वहां रहना जरूरी है। उस जगह 70 लोग क्या करेंगे? किसी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए 70 लोगों की आवश्यकता होती है क्या? इस बात का जिक्र भी आदित्य ठाकरे ने किया है।

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