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ये है ईडी की दादागीरी! मनी लॉन्ड्रिंग हुआ ही नहीं तो अपराध कैसा? सारे काम अनुमति से फिर भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला किया दर्ज, आरटीआई से हुआ खुलासा, मनपा ने नियमानुसार दी है परमीशन

सामना संवाददाता / मुंबई
जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक रोड स्थित सुप्रीमो क्लब भूखंड के कथित दुरुपयोग मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और ‘ईडी’ ने मामला दर्ज किया है। एक तरह से यह ‘ईडी’ की दादागीरी है, क्योंकि इस मामले में सारे काम अनुमति लेकर किए गए हैं, फिर भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में ५०० करोड़ रुपए की हेराफेरी का आरोप लगाकर स्थानीय शिवसेना विधायक रवींद्र वायकर के पीछे जांच एजेंसियां हाथ धोकर पीछे पड़ गई हैं। हालांकि, सूचना अधिकार के तहत मनपा की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों से ही साफ हो गया है कि उक्त भूखंड के इस्तेमाल और उसके लिए दी गई मंजूरी नियमानुसार है।
बता दें कि दस्तावेजों से यह स्पष्ट हो गया है कि इसमें किसी तरह की भी अनियमितता नहीं हुई है। इसके साथ ही उक्त भूखंड के इस्तेमाल से बीते १९ सालों में वित्तीय कारोबार को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट है कि इस मामले में कोई मनी लॉन्ड्रिंग नहीं हुई है। इसके बाद भी सवाल यह उठता है कि मामला दर्ज कर जांच का दिखावा किसलिए है?
मनपा की ओर से जोगेश्वरी में सुप्रीमो क्लब की जगह त्रिपक्षीय करार द्वारा २००४ में जिस उद्देश्य के लिए दी गई थी, उस उद्देश्य के लिए उसका इस्तेमाल न करते हुए वित्तीय कारणों से किया। साथ ही मनपा से हुए समझौते का तथ्य छिपाकर उसी स्थान पर २०२१ में १४ मंजिला स्टार होटल बनाने की अनुमति ले ली गई। मनपा ने सितंबर २०२३ में आजाद मैदान पुलिस स्टेशन में शिकायत की थी कि प्रस्तावित निर्माण से प्लॉट मालिकों को करोड़ों रुपए का फायदा होगा। भाजपा के किरीट सोमैया ने वित्तीय हेराफेरी की शिकायत वित्तीय अपराध शाखा और ‘ईडी’ से भी की है। उसके आधार पर संबंधित जांच एजेंसियों ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मुंबई मनपा ने उससे पहले ही १७ अक्टूबर २०२२ को एक पत्र के माध्यम से सुप्रीमो बैंक्वेट क्लब के भूखंड पर नियमों के अनुसार सभी मंजूरियां पहले ही दे दी हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि विकास नियंत्रण व प्रोन्नति नियमावली २०३४ में कोई अनियमितता नहीं है।
उक्त भूखंड के उपयोग के संबंध में १९९१ के विकास नियंत्रण नियमावली के अनुसार २००४ में हुए त्रिपक्षीय समझौते और उसकी शर्तों तथा विकास नियम २०३४ के अनुसार उक्त भूखंड के उपयोग हेतु दी गई अनुमति की जानकारी मनपा प्रशासन के पास उपलब्ध है। मनपा के एक उप अभियंता द्वारा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई जाती है। साथ ही मनपा द्वारा भूखंड के उपयोग के लिए दी गई अनुमति भी रद्द कर दी गई। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अचानक हुए घटनाक्रम से यह आशंका जताई जा रही है कि मनपा प्रशासन और ईडी समेत अन्य जांच एजेंसियों की चल रही गतिविधियां राजनीतिक दबाव के कारण हो रही हैं।

विधायक रवींद्र वायकर ने यह भी कहा कि उन्होंने किसी भी तरह की अनियमितता या अपराध नहीं किया है। ‘सामना’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि फिर भी हमें संबंधित एजेंसियां जानबूझकर परेशान कर रही हैं। सुप्रीमो बैंक्वेट का भूखंड हमारा मालिकाना है। मुंबई की विकास प्रारूप योजना और जगह पर आरक्षण के अनुसार, मनपा से अनुमति लेकर पिछले १९ वर्षों से इसका उपयोग किया जा रहा है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि उक्त स्थान पर विवाह समारोह और रिसेप्शन आयोजित नहीं किए जाएंगे। मुंबई में कई प्लॉट्स का इस्तेमाल इसके लिए किया जा रहा है। पिछले १९ वर्षों में इस भूखंड के उपयोग से बिजली, पानी और अन्य सुविधाओं पर खर्च काटकर १२ करोड़ की आय प्राप्त हुई। इसकी जानकारी समय-समय पर आयकर विभाग को दी जाती रही है। हमने कुछ भी नहीं छिपाया है।

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