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सवाल आपके… जवाब हमारे!

मुंबई हाई कोर्ट में ९४ जजों की मंजूरी है पर वर्तमान में सिर्फ  ५७ जज काम कर रहे हैं। यह क्षमता से ४० कम है। जस्टिस साधना जाधव के रिटायर होने के बाद यह कमी और बढ़ जाएगी। ४ नवंबर तक ६ और जज रिटायर हो जाएंगे। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हाई कोर्ट में करीब ६ लाख केस पेंडिंग पड़े हैं। क्या केंद्र  सरकार को इस मामले की गंभीरता पर ध्यान नहीं देना चाहिए?

समय व धन की बर्बादी
आज जजों की कमी के चलते बड़ी संख्या में केस पेंडिंग हैं और लोग परेशान हो रहे हैं। इससे समय व धन की बर्बादी हो रही है। कमोबेश हर जगह यही स्थिति है।केंद्र सरकार को चाहिए जजों के खाली स्थान को तुरंत भरे, जिससे लोगों को समय पर न्याय मिल सके। आज हाई कोर्ट में ४० फीसदी जज कम हैं, जिसके कारण ६ लाख केस पेंडिंग हैं। कई केस ऐसे हैं जिसमें फैसला  नहीं होने से लोग काफी परेशान हैं। केंद्र सरकार को ऐसे ज्वलंत मुद्दों का तुरंत समाधान करना चाहिए।
-शिवगोविंद श्रीवास्तव, उल्हासनगर

केंद्र संज्ञान ले
जजों की संख्या कम होने के कारण लोगों को न्याय पाने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। काम का अधिक बोझ रहने के कारण लोगों को कोर्ट से तारीख पर तारीख मिलती रहती हैं। केंद्र सरकार को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और जजों की नियुक्ति करनी चाहिए।
-अजय पांडे, बांद्रा

शीघ्र नियुक्ति की जाए
मुंबई हाई कोर्ट में ६ लाख केस प्रलंबित हैं। हाई कोर्ट में ९४ जजों की जगह वर्तमान में ५७ जज ही काम कर रहे हैं। इसे ध्यान में रखकर शीघ्र नए जजों की नियुक्ति की जानी चाहिए। इस संदर्भ में केंद्र सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए, जिससे प्रलंबित पड़े केसेस को शीघ्र सुलझाया जा सके और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे लोगों के साथ शीघ्र न्याय करना चाहिए।
-मीरा चौधरी, सीतामढ़ी, (बिहार)

 कमी से गड़बड़ी
देश की कई अदालतें ऐसी हैं, जहां सिर्फ और सिर्फ तारीखें ही दी जाती हैं। कई केस में अंडर ट्रायल कैदी सजा से ज्यादा वक्त जेल में गुजार चुका होता है। मीडिया में इससे जुड़ी खबरें भी आती रहती हैं। जजों की कमी की वजह से ही यह सब गड़बड़ी हो रही है।
-अभय पांडेय, कल्याण

 केसों की संख्या बढ़ेगी
जजों की नियुक्ति जल्द-से-जल्द होनी चाहिए। ४० फीसदी जजों की कमी काफी ज्यादा है। ऐसे में पेंडिंग केसों की संख्या बढ़ेगी और तारीख पर तारीख मिलती रहेगी। केंद्र सरकार को इस पर ध्यान देकर जजों की नियुक्ति पर ध्यान देना चाहिए।
-रंजीता कुमारी, वसई

आज का सवाल?
मानसून के दौरान प्राकृतिक हादसे काफी जानलेवा होते हैं। इन हादसों का सामना करने के लिए राज्य सरकार की पहल पर १,८०० होम गाड्र्स को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। १८ से ३५ की उम्रवाले ये जवान घटनास्थल पर फौरन पहुंचकर राहत व बचाव कार्य शुरू कर देंगे। ऐसे में कई जानें बचाई जा सकेंगी और पीड़ितों को तुरंत राहत मिल सकेगी।
आप क्या सोचते हैं? तुरंत लिखकर भेजें या मोबाइल नं. ९३२४१७६७६९ पर व्हॉट्सऐप करें।

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