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भाजपा राज में युवाओं की उड़ी हवाइयां … चार फीसदी घट गई नौकरियां!

 पिछले साल के मुकाबले कंपनियों ने कम की भर्तियां
 फाउंडइट इनसाइट्स ट्रैकर की रिपोर्ट का खुलासा

सामना संवाददाता / मुंबई
भाजपा सरकार भले ही देश में खुशहाली का दावा करती हो पर असल में देश में बेरोजगारी बढ़ी है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के लिए यह बुरी खबर है। ताजा खबर के अनुसार, हिंदुस्थानी कंपनियों द्वारा मार्च के महीने में की गई भर्तियां पिछले साल की समान अवधि की तुलना में चार प्रतिशत घट गर्इं।
मिली जानकारी के अनुसार, कल मंगलवार २ अप्रैल को जारी एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि गत मार्च में देश में कंपनियों ने कम लोगों की भर्तियां कीं। हालांकि, अगर गत फरवरी की तुलना की जाए तो मार्च के महीने में भर्ती गतिविधियां हल्की बढ़ी नजर आती हैं। फाउंडइट इनसाइट्स ट्रैकर की रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ है। गौरतलब है कि मार्च, २०२३ से मार्च २०२४ तक के भर्ती आंकड़ों के विश्लेषण से तैयार रिपोर्ट से पता चलता है कि युवाओं को स्थाई नौकरियां नहीं मिलीं पर ग्राहकों को अस्थाई रूप से सेवाएं देने वाले पेशेवरों या प्रâीलांस काम में एक साल पहले की तुलना में वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट कहती है कि यह लचीली, परियोजना-आधारित कार्य व्यवस्थाओं के लिए पेशेवरों की बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाता है। इस तरह के पेशेवरों में स्वतंत्र वकील, शिक्षक, लेखाकार, प्रबंधन सलाहकार और अन्य व्यवसायों से जुड़े लोग शामिल होते हैं। इसके अलावा कार्यबल में अहम हिस्सेदारी रखने वाले अस्थाई कामगारों का अनुपात इसी अवधि में बढ़ा है। यह व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रâीलांसर और स्वतंत्र ठेकेदारों पर कंपनियों की बढ़ती निर्भरता को दिखाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, काम के आधार पर भुगतान पाने वाले अस्थाई कामगारों पर आधारित अर्थव्यवस्था में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र सबसे आगे है। इसमें आईटी सॉफ्टवेयर की हिस्सेदारी लगभग दोगुनी हो गई है जो मार्च, २०२३ में २२ प्रतिशत से बढ़कर मार्च २०२४ में ४६ प्रतिशत हो गई है। फाउंडइट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शेखर गरिसा ने कहा, ‘अपने ट्रैकर के जरिए हमने देखा है कि दिल्ली, बंगलुरु और मुंबई के महानगर अब अस्थाई या प्रâीलांस सेवा के लिए मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।

 

 

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