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देश में युवाशक्ति हो रही है बेकार! … २५ वर्ष से कम उम्र के ४२ फीसदी युवा हैं बेरोजगार

सामना संवाददाता / मुंबई
केंद्र की मोदी सरकार, भाजपा और उसकी सोशल मीडिया सेल देश के विकास का ढोल पीट रही है। देश के जल्द ही दुनिया की तीसरी आर्थिक महासत्ता बनने का दावा कर रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि देश में मंहगाई और बेरोजगारी से हाहाकार मचा हुआ है। देश में बेरोजगारी को लेकर एक विचलित करनेवाली रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में २५ साल से कम उम्र के ४२.३ फीसदी युवा ग्रेजुएट बेरोजगार हैं। २०१९-२० में देश में बेरोजगारी दर ८.८ फीसदी थी, जो २०२०-२१ में घटकर ७.५ फीसदी और वित्त वर्ष २०२२-२३ में ६.६ फीसदी पर आ गई है, लेकिन पढ़े-लिखे युवाओं में बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी देखने को मिली है। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की स्टेट ऑफ वर्विंâग इंडिया २०२३ के हवाले से ये जानकारी सामने आई है।
गौरतलब हो कि पहले आरबीआई की रिपोर्ट आई थी कि ५० सालों में लोगों की बचत निचले स्तर पर जा पहुंची है और लोगों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। अब अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा २२.८ फीसदी बेरोजगारी दर २५ से २९ वर्षीय युवाओं के बीच है। उच्च माध्यमिक स्तर की शिक्षा प्राप्त करनेवाले २५ वर्ष से कम आयु के युवाओं बेरोजगारी दर २१.४ फीसदी है, जो सबसे ज्यादा है। ३५ वर्ष और उससे अधिक आयु के स्नातकों में बेरोजगारी दर पांच फीसदी से कम है, जबकि ४० साल या उससे अधिक उम्र वाले ग्रेजुएट लोगों में बेरोजगारी दर महज १.६ फीसदी है। रिपोर्ट के मुताबिक, २५ साल से कम आयु के अनपढ़ युवाओं में बेरोजगारी दर १३.५ फीसदी पाई गई है, जबकि ४० साल या उससे ज्यादा उम्र के अनपढ़ वर्ग में बेरोजगारी दर २.४ फीसदी है। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की यह रिपोर्ट सरकारी आंकड़ों पर आधारित है।

कम हुई महिलाओं की आय
एनएसओ के रोजगार-बेरोजगारी सर्वे, लेबर वर्क फोर्स सर्वे, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण, जनसंख्या जनगणना जैसे आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। ग्रामीण कर्नाटक और राजस्थान में इंडिया वर्विंâग सर्वे के नाम से एक विशेष सर्वेक्षण भी किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि देश में बेरोजगारी दर में भले ही कमी आई हो, लेकिन इनकम लेवल स्थिर बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं की इनकम कोरोना महामारी के दस्तक देने के पहले से घटने लगी थी। २००४ के बाद से महिला रोजगार दर में या तो गिरावट आ रही थी या वो स्थिर बनी हुई थी। २०१९ के बाद से महिलाओं के रोजगार में बढ़ोतरी आई है। महामारी के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं ने स्व-रोजगार को अपनाया है। कोरोना महामारी के पहले ५० फीसदी महिलाएं स्व-रोजगार में थीं और महामारी के बाद से आंकड़ा बढ़कर ६० फीसदी हो गया है।

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