" /> अपराध की दलदल में फंसते युवा!

अपराध की दलदल में फंसते युवा!

आधुनिक दौर में बदलती जीवन शैली और सुख-सुविधा की चाह में नई उम्र के लड़के अपराध की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। देश में युवा अपराधियों का ग्राफ चिंता का बड़ा कारण है। माता-पिता और परिवार के लाखों सपनों को चकनाचूर कर शानो-शौकत की चाह में युवा अपराध की डगर पर चल पड़ते हैं। कोई लूटपाट में तो किसी ने ठगी का रास्ता पकड़ा है। इसका कारण बढ़ती बेरोजगारी को मानें या फिर हाईफाई जीवन जीने की चाहत। बढ़िया ब्रांडेड कपड़े पहनने और अपनी गर्ल प्रâेंड को मंहगे गिफ्ट देने के लिए युवा अपराध के दलदल में भी फंसने से डर नहीं रहे हैं। आए दिन ऐसे समाचार पढ़ने-सुनने को मिल जाते हैं कि युवा ने अपने और अपने दोस्तों के मंहगे शौक पूरे करने या फिर नशे की लत के लिए अपराध को अंजाम दे डाला। एक अनुमान के अनुसार देश में हो रही आपराधिक गतिविधियों में ७० प्रतिशत युवाओं की भागीदारी होती है।
महानगरों, कस्बों और गांवों में स्मैक, गांजा अफीम के नशे की गिरफ्त में फंसे युवक अपराध की दलदल में धंसते जा रहे हैं। वे नशे की लत को पूरा करने के लिए अपराधों की डगर पर चल पड़े हैं। इसके चलते वह चोरी तथा लूट की वारदातों को अंजाम देने में भी कतई संकोच नहीं कर रहे हैं। पिछले कुछ समय में देश में अपराधों का ग्राफ बढ़ा है। सरकारी आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं। चोरी, लूट छीना-झपटी की बढ़ती घटनाओं ने पुलिस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, लेकिन इससे भी चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश वारदातों को अंजाम देनेवाले शातिर बदमाश नहीं बल्कि नौजवान किशोर हैं। नशे की बुरी आदत के कारण नौजवान-किशोर कम उम्र में ही अपराध जगत की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
कोरोना आपदा के समय वैक्सीन और दवाइयों की कालाबाजारी और ठगी में कई युवाओं का नाम सामने आया। दिल्ली पुलिस ने मध्य प्रदेश की एक १८ वर्षीय युवती पर रेमडेसिवीर इंजेक्शन की आनलाइन ठगी का मामला दर्ज किया। उत्तराखंड पुलिस ने पिछले दस दिनों के भीतर १० से अधिक युवाओं को दुकान और मंदिर में चोरी करते हुए पकड़ा है। कुछ युवाओं को बाइकों की चोरी करने के आरोप में भी पकड़ा गया है। इन सबकी उम्र १८ से २५ साल के करीब है। पुलिस पूछताछ के दौरान युवकों ने बताया कि कोरोना काल में घर वालों के साथ ही खुद का खर्चा भी नहीं चल पा रहा था, जिसके चलते वे चोरी करने लगे।
समाज विज्ञानियों के अनुसार, परिवार के माहौल के कारण भी बहुत से अपराध होते हैं। जब युवाओं को परिवार की ओर से मानसिक तनाव होता है तो वो अपराधी बन जाते हैं। नकारात्मक विचार और गलत संगत भी युवाओं को अपराध की अंधी गली में धकेल देती है। वहीं सामाजिक गतिविधियों का भी बेहद असर बच्चों और युवाओं के दिमाग पर पड़ता है। युवा जो देखते हैं वैसा ही करने की कोशिश करते हैं। आज के समय में ज्यादातर फिल्मों में खून-खराबा और अपराध को देखकर युवा उसकी नकल करने की कोशिश करते हैं। मनोविज्ञानी मानते हैं कि युवा आजकल नशे व महंगे शौक की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। परिजनों से जो पॉकेट मनी मिलती है, वह जब कम पड़ने लगती है तो युवा अपराध की तरफ बढ़ने लगे। ऐसे में युवाओं की काउंसिलिंग होनी चाहिए। परिजनों को उन्हें समझाना चाहिए, जिससे वे अपराध के रास्ते की तरफ न बढ़ें। कई सामाजिक संस्थाएं इस विषय पर काम कर रही हैं और युवाओं की मानसिक स्थिति को सुधारने का प्रयास कर रही हैं। कई सरकारी संस्थाएं भी इस विषय पर काम कर रही हैं। जाने या अनजाने, गलत संगति के कारण अपराध में लिप्त किशोरों को सही रास्ते पर लाने का पुलिस ने भी संकल्प लिया है। दिल्ली, मुंबई और यूपी सहित देश के कई राज्यों में पुलिस रास्ते से भटके किशोरों और युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रही हैं। समाज को भी इस दिशा में आगे बढ़कर सहयोग देना होगा। युवा हमारे देश का भविष्य हैं और हम सबकी ये जिम्मेदारी बनती है कि हम अपने भविष्य को अपराध के रास्ते पर जाने से रोकें।
(लेखक उप्र राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।)