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देश में बढ़ रही है युवा बेरोजगारी! … केंद्र सरकार की स्वीकारोक्ति

सीएमआईई रिपोर्ट से हुआ खुलासा
सामना संवाददाता / मुंबई
वर्ष २०१४ में सत्ता में आने से पहले भाजपा ने देश में हर साल २ करोड़ नए रोजगार सृजित करने और देश से बेरोजगारी हटाने का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी ने युवाओं को रोजगार देने के उस वादे को जोर-शोर से दोहराया था, लेकिन परिणाम इसके उलट रहा। मोदी सरकार जब से सत्ता में आई है, तब से देश में बेरोजगारी बढ़ती ही जा रही है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के द्वारा बेरोजगारों पर जारी होनेवाले आंकड़े अक्सर मोदी सरकार के दावे की पोल खोलते रहते हैं। उक्त संस्था ने हाल ही में नए आंकड़े जारी किए।
ताजा आंकड़ों में संस्था ने स्पष्ट किया है कि देश में २० से ३४ साल के युवाओं में बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है। ग्रामीण इलाकों में इसका प्रमाण ज्यादा है।
पिछले तीन सालों में इस वर्ष युवा बेरोजगारी का आंकड़ा सबसे अधिक है। इसके पीछे कई कारण हैं, जैसे कई कंपनियां बंद हो रही हैं तो कई बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं। ऐसी कई शिकायतें पीएम कार्यालय को भी की गई है।
मोदी राज में बढ़ी बेरोजगारी
रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ ६ महीने में ही २० से २४ आयु वर्ग के लोगों में बेरोजगारी का आंकड़ा लगभग १ अंक बढ़कर ४४.४९ प्रतिशत हो गया है। २५-२९ आयु वर्ग के लिए यह १३.३५ से बढ़कर १४.३३ प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसी तरह ३०-३४ आयु वर्ग के लिए बेरोजगारी दर १० तिमाहियों के उच्चतम २.४९ प्रतिशत पर रही, जो पिछली तिमाही में २.०६ प्रतिशत थी।
ग्रामीण बेरोजगारों में यह २०-२४ आयु वर्ग (४३.७९ प्रतिशत) में सबसे अधिक हो गई, इसके बाद २५-२९ आयु वर्ग में बेरोजगारी दर १३.०६ प्रतिशत और ३०-३४ आयु वर्ग में २.२४ प्रतिशत रही है, जबकि अब यह आंकड़ा बढ़ गया है। ग्रामीण इलाकों में मनरेगा के तहत काम मांगनेवालों में १५ प्रतिशत तक की वृद्धि इस तिमाही में हुई है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के आंकड़े भी सीएमआईई द्वारा ग्रामीण बेरोजगारी को लेकर निकाले गए निष्कर्षों की पुष्टि करता है। मनरेगा ग्रामीण भारत में रोजगार का सबसे बड़ा प्रदाता है।

 

 

 

 

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