धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महायुति सरकार के शासन में महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में वर्ष २०२३ में ऐसे २२,३३० मामले सामने आए हैं। इस तरह हर दिन औसतन ६३ बच्चों पर अत्याचार हो रहा है, जबकि अकेले मुंबई में ३२१२ मामलों के साथ शहर सबसे ऊपर पहुंच गया है। ठाणे और पुणे जैसे बड़े शहरों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। बच्चों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार की पोल इन आंकड़ों से खुल गई है। मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए लिखित जवाब से यह कड़वी हकीकत सामने आई है कि महायुति राज में नाबालिग भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कल दिए अपने लिखित जवाब में बताया है कि एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष २०२१ में बच्चों पर अत्याचार के १७,५६३ मामले दर्ज हुए थे, जो २०२२ में बढ़कर २०,६८२ और २०२३ में २२,३३० तक पहुंच गए। इस तरह तीन वर्षों में इन अपराधों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई है। कुल अपराधों में बच्चों पर अत्याचार का हिस्सा भी बढ़कर ११.१ प्रतिशत तक पहुंच गया है। विपक्ष का कहना है कि यह आंकड़े बताते हैं कि राज्य में बच्चों की सुरक्षा के मोर्चे पर सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।
मुंबई की हालत चिंताजनक
सबसे चिंताजनक स्थिति महानगरी मुंबई की है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, बच्चों पर अत्याचार के मामलों में मुंबई ३२१२ मामलों के साथ राज्य में पहले स्थान पर है। इसके बाद ठाणे में २२३६, पुणे में ३५६, मीरा-भायंदर में १०६७ और पुणे ग्रामीण में ८७८ मामले दर्ज किए गए हैं। मुंबई जैसे महानगर में बच्चों पर बढ़ते अपराधों ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
सरकार का दावा, किए जा रहे कई उपाय
सरकार ने अपने जवाब में दावा किया है कि बच्चों पर अत्याचार रोकने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। राज्य की ४५ पुलिस इकाइयों में विशेष बाल पुलिस इकाइयां बनाई गई हैं और सभी पुलिस थानों में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। वर्तमान में राज्य में ९,५६५ बाल कल्याण पुलिस अधिकारी कार्यरत हैं। इसके अलावा पुलिस अधिकारी स्कूल-कॉलेजों में जाकर जागरूकता अभियान चलाते हैं। पीड़ित बच्चों की मदद के लिए १२४ महिला विशेष परामर्श केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं, जबकि आपात सहायता के लिए डायल ११२ सेवा उपलब्ध है।
मुख्य आंकड़े
२०२१ – १७,५६३ मामले
२०२२ – २०,६८२ मामले
२०२३ – २२,३३० मामले
सबसे अधिक मामले
मुंबई – ३२१२
ठाणे – २२३६
मीरा-भायंदर – १०६७
पुणे ग्रामीण – ८७८
पुणे – ३५६
महाराष्ट्र में नाबालिगों की सुरक्षा पर संकट
हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि सरकारी योजनाओं और दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात नहीं सुधर रहे हैं। लगातार बढ़ते आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि महायुति सरकार के दौर में महाराष्ट्र में नाबालिगों की सुरक्षा गंभीर संकट में है।
