मुख्यपृष्ठसंपादकीय

संपादकीय

संपादकीय: कांग्रेस में ‘रिसाव’ का मौसम!

कांग्रेस पार्टी की अवस्था बादल फटने जैसी हो गई है। पैबंद भी कहां लगाएं? पंजाब में कांग्रेस के नेता सुनील जाखड़ और गुजरात से...

संपादकीय: २०२४ का उत्खनन शुरू?

फिलहाल वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद का मुद्दा भाजपा ने एजेंडे पर ले लिया है, ऐसा प्रतीत होता है। प्रकरण न्यायालय में चल ही रहा...

संपादकीय: खुराफाती पड़ोसी

चीन और पाकिस्तान हमारे पड़ोसी देश हैं फिर भी हमारे लिए हमेशा सिरदर्द ही साबित होते रहे हैं। शासक कोई भी होगा परंतु हिंदुस्थान...

संपादकीय : घोटाले ही घोटाले!

मौजूदा समय में घोटाला अपने देश में रोजाना चर्चा का विषय बना हुआ है। उसमें बैंक के घोटाले और अनियमितताएं आम हैं। अब पिछले...

संपादकीय : ढलान पर पहुंची गाड़ी!

विफलता से ग्रस्त विपक्षी नेता व ढलान पर पहुंची गाड़ी को ब्रेक लगाना कठिन होता है। हमारे विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस का ठीक...

संपादकीय: तूफानी सभा का संकेत!

मुंबई में शिवसेना की शानदार सभा हुई। शिवसेना की सभाओं में जुटनेवाली भीड़ का आकलन आज तक कोई नहीं कर पाया है। बीकेसी के...

सरकार का दिमाग ठिकाने पर है!

देशद्रोह की धारा का सर्वाधिक दुरुपयोग बीते सात वर्षों में हुआ है। राजनीतिक विरोधियों पर ‘नकेल' कसने के लिए पीएमएलए, देशद्रोह और यूपीए आदि...

महंगाई पर मुंह कब खोलोगे?

केंद्रीय वित्तमंत्री को हमारे देश की महंगाई ‘अधिक’ नहीं लगती होगी, फिर भी वर्तमान में देश में महंगाई ८ वर्षों के उच्चांक पर पहुंच...

अर्थार्थ : अमृत महोत्सव और हिंदुस्थान की अर्थ यात्रा

पी. जायसवाल हिंदुस्थान की आजादी का ७५ वां साल है फिर भी यह प्रश्न सालता है कि हम अभी तक विकासशील ही क्यों है? हम...

भगवान का बाप कौन?

मुझे शिखा, जनेऊ, सिर्फ घंटा बजानेवाला हिंदुत्व नहीं चाहिए, ऐसा हिंदृहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे हमेशा कहते थे। उनका हिंदुत्व विज्ञानवादी व प्रगतिशील था, परंतु...

संपादकीय : कहां खालिस्तान कहां दाऊद!

पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में अस्थिरता और अशांति पैâलना देशहित में नहीं है। पिछले कई दिनों से वहां घट रही घटनाएं चिंताजनक हैं। पंजाब...

संपादकीय : श्रीलंका में ‘पब्लिक क्राय’!

श्रीलंका के भीषण आर्थिक संकट ने अब विकराल रूप धारण कर लिया है। हिंद महासागर में हिंदुस्थान का करीबी पड़ोसी और प्रकृति से आच्छादित...

संपादकीय : मु.पो. हेरवाड! …ऐसा यह महाराष्ट्र!

महाराष्ट्र सामाजिक क्रांति का अग्रदूत है, यह सिद्ध करनेवाली घटना कोल्हापुर के हेरवाड गांव में घटी है। शिरोल तालुका अंतर्गत हेरवाड गांव। इस गांव...

संपादकीय : कर-करके थक गए! …सुनो बग्गा की कहानी!!

सत्ता का नशा खतरनाक होता है। यह नशा अच्छे-अच्छों को बर्बाद कर देता है, ऐसा महाभारत, पुराण काल के समय से देखा जा रहा...

रोखठोक : फुले बनाम तिलक ….राजनीति से समाधि की ओर

रायगढ़ पर स्थित शिवराय की समाधि की खोज किसने की, इस पर कुछ लोगों ने इतिहास को गींजना शुरू कर दिया है। ‘महात्मा फुले...

अन्य समाचार