बारह मास बहती हो सरिता,
अथाह जल बरसाता वारिद,
मात्र एक बूंद स्वाति नक्षत्र की
श्वासों की डोर थाम लेती
प्यारे पाखी चातक की।
जीवन का एक-एक क्षण
जीती सीप...
चलो कुछ अल्फाज लिखते हैं,
तुम्हारे नाम एक ताज लिखते हैं।
तुम्हारे गालों में लिपटी हया पर,
सुनहरी यादों के साज लिखते हैं।
चलो कुछ अल्फाज लिखते हैं।
बिखरते...
-डॉ. प्रियंका सौरभ
पानी की जब चली फुहार,
खिल उठता बच्चों का संसार।
हंसी उड़ाती संग हवाएं,
मस्ती-गीत सभी मिल गाएं।
हरी घास पर नंगे पांव,
भागें बच्चे लेकर चाव।
कोई...
सांझ-सवेरे आरती, पांचों वक्त अजान।
पर बातें सब प्यार की, भूल गया इंसान।।
मंदिर-मस्जिद घूमकर, खोजे रब का द्वार।
मन के भीतर झाँकना, समझे नहीं विचार।
नफ़रत की...