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नमस्ते सामना

हिंदी गजल : अश्रुधारा ठहर न पायेगी

अश्रुधारा ठहर न पायेगी बाँध टूटा तक बाढ़ आयेगी देख सौतन से कुछ मती कहियो खींचकर ये ही पी को लायेगी श्वास जैसी सखी नहीं कोई संग आयी है...

हिंदी गजल : झेल सकता हृदय टकोर नहीं

झेल सकता हृदय टकोर नहीं भाव कोमल रखो कठोर नहीं मुक्ति सौतन भी चाहती है पर रात की हो रही है भोर नहीं प्रीत की रीत आप क्या...

हिंदी गजल : भय न बंधन को देख दरपन में

भय न बंधन को देख दरपन में मुक्त जोगन को देख दरपन में सौत कुछ भी नहीं तेरे आगे अपने जोबन को देख दरपन में जिसने यमराज को...

मां

मां से बढ़कर दुनिया में दूसरा ना कोई। मां जननी है, मां शिक्षिका है और मां, बच्चों की सबसे करीबी दोस्त/सखी/ सहेली है। मां पास ना रहकर...

बप्पा फिर बाजारों में

सज गए हैं बप्पा फिर बाजारों में अब होगा मोल तोल खरीददारों में, कोई पूछेगा-कितने के हैं? कोई कहेगा-थोड़े कम कर दीजिए! अब भाव तय होंगे भगवान के...

मोगरा के फूल

दृष्टि में आए दुग्ध-धवल मंजुल मोगरा के पुष्प। दिवस ढल रहा, निशा नायिका पग-पग आगे बढ़ रही। मोगरे के ये श्वेत, सीप-मुक्ता से पुष्प, पल-पल पांखुरी खोल मुग्ध सुगंध फैला रहे। अवनी और अंबर महक...

जीवन-मृत्यु

अपनों के बीच जलील होकर जीना, जिंदगी नहीं कहलाता है। मृत्यु का क्या है? दिल का धड़कना ठहर गया, सांसों का विचरना एकाएक थम जाना, आंखें सदा के...

रक्षाबंधन

राखी के धागे को बांधकर, मुहं में खिला मिष्ठान, कहे बहन, मेरे प्यारे भैया, रखना मेरी आन। हर्षित मन से करे आरती, भैया, रहना दुख में सारथी। वचन रक्षा का...

आव्हान

देश की प्यारी युवा पीढ़ी से सादर मेरा आव्हान अपने अपने सद्कर्मों से बनो देश की शान। प्यारे जेन जी और जेन अल्फा तुमसे है उम्मीद बहुत अपना सारा देश...

क्या एक औरत कामयाब नहीं हो सकती?

क्या एक औरत कामयाब नहीं हो सकती? क्या वो कभी आसमान को छू नहीं सकती? क्या वो अपने ख्वाबों को बुन नहीं सकती? क्या वो अपनी ही बनाई जिंदगी में खुश...

स्वस्थ रहे देह!

बोलना लगता है अच्छा सब जन करते संवाद नाभी से निकला नाद बनता शब्दों का संदेश। कथित शब्द हो सकते मीठे और कड़वे खुल कर अन्यथा दबा कर रहस्य खुलते या...

काल से बना महाकाल हूं मैं

काल से बना महाकाल हूं मैं, हर रूप से विकराल हूं मैं। रंग से बेरंग हूं मैं, मन भोले संग हूं मैं। नीलकंठ विष से हूं मैं, हर अंत...

मन बनाम आत्मा

सही मार्गदर्शक है हमारे अंतस्थ में विराजमान शांत आत्मा। जब-जब मन भटकता है, आत्मा की आवाज उसे उचित-अनुचित का ज्ञान कराती है। मन हमारे अधीन है। जहां चाहे, इस मन रूपी...

छद्म नीतियां!

भीषण नाजुक समय से विश्व गुज़र रहा है, विकसित देशों का स्वार्थ खुलकर सामने आ गया। दादागिरी इनकी बढ़ती जा रही, लोभ-लिप्सा अब छुपी न रह सकी। विकसित देश खेल...

बुद्धिजीवियों

ज्ञानियों, ध्यानियों, साधकों, विचारकों, विद्वानों— जागो! शब्द उठाओ, दागो एक साथ, एक बार, एक जगह, एकजुटता के साथ उस किले पर, जहां विनाश है, अंधविश्वास है, सर्वनाश है। और रख दो अपना जलता हुआ विचार, लोकमंगल का, एकतरफा। इस समय जोखिम उठाते हुए, मुक्तिबोध की...
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