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नमस्ते सामना

अनशन युद्ध

यह तृतीय विश्व युद्ध नहीं यह व्यावसायिक युद्ध है पूंजीपतियों का। जो चल रहा है विश्व स्तर पर। और यहां हमारे यहां जो चल रहा है अनशन युद्ध यह तैयारी है दूसरे...

नयन कथा

जब होता मन अधीर नयन बहाते अविरल नीर व्यथा सुनते, कहते रह न पाते झर-झर आंसुओं की झड़ी लगाते कभी यह चंचल नयन हो जाते गंभीर सजल हो जाती...

प्रभात का तारा

जैसे ही रवी की पहली किरणें व्योम पर छाई तारों की टोली ने छुपने की होड़ लगाई एक तारा नहीं डरा था अपनी कांति लिये अम्बर पर...

गजल

इश्क में आदमी बीमार भी हो सकता है जुल्फें-जानां में गिरफ्तार भी हो सकता है ये न समझो कि है सब खत्म तुम्हारे दम पर दिल में...

बूंदों का वरदान

इंद्रदेव हुए प्रसन्न, स्वर्गलोक से नीर बरसाया भीगी धरती गूंज उठी, सावन आया, सावन आया। हरी हरी चुनरिया ओढ़े, हरी-भरी ये वादियां प्रकृति के कैनवास पर सब्ज...

खुशबू से बिखर जाएंगे

मेरे हमसफर, मेरे हमराही तेरे साथ की कुछ मीठी बातें, अंधेरी स्याह कठिन रातें, मेरे हमराही यूं ही गुजर जाएंगी। चांद और जुगनुओं की रोशनियां, या हमारे बीच की...

बुनती जिंदगी…

अजब डिजाइन का मेरा स्वेटर बुनती जिंदगी हरेक सीधे के बाद दो फंदे उल्टे बुनती जिंदगी देखती रहती है! जो कहा नहीं वह सुनती जिंदगी मुझमें खामियां...

प्रयागराज में सनसनी : कहा-सुनी के बाद पति ने पत्नी का चाकू से गला रेता…गंभीर हालत में एसआरएन में भर्ती

राजेश सरकार / प्रयागराज शहर के प्राचीन ठठेरी बाजार (चौक) क्षेत्र में गुरुवार दोपहर घरेलू विवाद ने खूनी रूप ले लिया। पति-पत्नी के बीच हुई...

हम दोनों!

तेरे नयनों ने मुझे जब सहलाया मेरे नयन तभी मुझसे रूठ गये तेरे नयनों के लाल डोरे मेरे चेहरे की लाली बन गये तेरे हाथों की मरमरी छुअन...

कल हमको भी जाना होगा

कल हमको भी जाना होगा। अपना फर्ज निभाना होगा।। कविता में ही क्रांति बीज को। बोना और उगाना होगा।। मान रहा हूं कठिन काम है। फिर भी आगे आना...

मैं तो चुप हूं

मैं तो चुप हूं, लेकिन... मैंने हंसते हुए चेहरों के पीछे गमों को छिपते देखा, कहते थे वो सब- "जिंदगी है यारों, कट जाएगी।" उनकी आंखों को मैंने...

सपने का धोखा!

सोलह सावन बिता दिए राज महल में दासियों सखियों संग खेली थी जी भरके दौड़ी भागी अटारियों गलियारों में भर भर झोली तोड़े पुष्प बाग बगीचों से गद्दों...

अंधेरे में…

अंधेरे में गाना होगा। कुछ प्रकाश फैलाना होगा ।। जीवन है तो किसी तरह से । गाना और बजाना होगा ।। दाएं बाएं उत्तर दक्षिण। खूब नजर दौड़ना होगा...

सुकून के लिए…

कहीं बूंदों की रिमझिम, कहीं ‘बरसात’ का पानी ऐसे में सोचता है ‘पागल’ मन, ठहर जाए यहीं ‘जमीं पर सुकून के लिए। यही सुखद अहसास है बरसात का, मन...

कल

कल मिलने का वादा करके, कल पर बात टल जाती है। आस भरी आंखें राह निहारें, उम्मीद मगर थक जाती है। मां की चौखट, बाप का आंगन, हर आहट...
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