दृष्टि में आए
दुग्ध-धवल मंजुल
मोगरा के पुष्प।
दिवस ढल रहा,
निशा नायिका
पग-पग आगे बढ़ रही।
मोगरे के ये श्वेत,
सीप-मुक्ता से पुष्प,
पल-पल पांखुरी खोल
मुग्ध सुगंध फैला रहे।
अवनी और अंबर
महक...
राखी के धागे को बांधकर,
मुहं में खिला मिष्ठान,
कहे बहन, मेरे प्यारे भैया,
रखना मेरी आन।
हर्षित मन से करे आरती,
भैया, रहना दुख में सारथी।
वचन रक्षा का...
सही मार्गदर्शक है
हमारे अंतस्थ में विराजमान शांत आत्मा।
जब-जब मन भटकता है,
आत्मा की आवाज उसे
उचित-अनुचित का ज्ञान कराती है।
मन हमारे अधीन है।
जहां चाहे,
इस मन रूपी...
भीषण नाजुक समय से
विश्व गुज़र रहा है,
विकसित देशों का स्वार्थ
खुलकर सामने आ गया।
दादागिरी इनकी बढ़ती जा रही,
लोभ-लिप्सा अब छुपी न रह सकी।
विकसित देश खेल...
ज्ञानियों, ध्यानियों,
साधकों, विचारकों,
विद्वानों—
जागो!
शब्द उठाओ,
दागो
एक साथ,
एक बार,
एक जगह,
एकजुटता के साथ
उस किले पर,
जहां विनाश है,
अंधविश्वास है,
सर्वनाश है।
और रख दो
अपना
जलता हुआ विचार,
लोकमंगल का,
एकतरफा।
इस समय
जोखिम उठाते हुए,
मुक्तिबोध की...