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रौबीलो राजस्थान : अ‍ेक गांव रा मुखियो जी

बुलाकी शर्मा राजस्थान
पुराणै समय री बात है। अ‍ेक गांव हो। गांव हो जणै बठै अ‍ेक मुखियो जी हा। मुखियो जी हा जणै सगळा फैसला बे ही करता।‌ मुखियो जी री बैठक जमती। गांवआळा भेळा हुवता। आप-आपरी समस्यावां राखता। भांत-भांत रा लोग। भांत-भांत री समस्यावां‌। मुखियो जी तुरता-फुरत‌ फैसलो करता। अबार तो कोरट-कचैड़ियां में आगै री तारीखां दिरीजै। परमात्मा ई कोनी जाण सकै कै फैसलो कित्ती तारीखां पछै, कित्ता बरसां पछै आसी। पण आपांरा मुखियो जी मुंशी प्रेमचंद जी री कहाणी ‘पंच परमेश्वर’ री भांत साक्षात पंच परमेश्वर ई हा। बां रा फैसला दूजा गांवां में नजीर रूप चरचा में रेंवता।
गांव में सगळा बां री तारीफ करता पण अ‍ेक इसो जीव ई हो जिवैâ नै बां री तारीफ खारी आक लागती। पूरो ठोठ हो। मिंदर रै आगाड़ी ‌अर स्कूल रै पिछाड़ी चालणियो। साव अ‍ेकल-खुरड़ो। ना कोई आगै, ना लारै। जिकी साथै सात पैâरा लिया बा ‌सातवें दिन ई बीं नै छोड’र दूजै साथै भाजगी। पण बातां में उस्ताद। बो चावतो वैâ लोग बीं नै मुखियो जी मानै।
बीं टोटका ई करिया। दिनां तांई घर सूं बारै कोनी निकळतो पैâर फांफ मारतो वैâ जंगळ में तपस्या कर रैयो हो वैâ तीरथ करण नै गयोड़ो हो। पण धार्मिक इमेज बणा’र मुखियो बणण री बीं री चाल चाली कोनी।
सौभाग सूं अ‍ेक दिन स्कूल रा मास्टर जी बीं नै मार्ग बतायो। कैयो कै पैला कीं टाबरां नै त्यार कर। बां नै नींबू रस री गोळ्यां देय’र पोटा कै बे तन्नै मुखियो जी कैवै। जद बे तन्नै मुखियो जी कैवै जणै तूं रीस दिखावतो बां रै लारै भाज्यै। टाबरां नै मजो आवण लागसी। टाबरां रै देखा-देखी मोटोड़ा ई तन्नै मुखियो जी कैवण लागसी। कैई दिन लोगां नै गाळ्यां काढणी है। रीस करणी है। लारै भाजण रो नाटक करणो है। फेर जद सगळा ई मुखियो जी कैवण लागै जणै हुंकारो देंवणो सरू कर दियै।
मास्टर जी री मसखरी में दियोड़ी सलाह बीं सारू रामबाण बणगी। गांव में अबै सगळा बीं नै मुखियो जी कैवै। गांव रा मुखियो जी तकात बीं नै मुखियो वैâय’र बतळावण लाग्या।
नांव रो चमत्कार कै दो-तीन बरसां में लोग बीं नै साचीलो मुखियो जी मानण लाग्या। पैला आळा मुखियो जी गांव सूं नीं जाणै कियां गायब हुयग्या। अबै दूजां सूं बो खुद नै कणैई भगवान विष्णु रो अवतार कै कोई दूजो अवतार घोषित करावतो रैवै अर बीं रा भगत जै-जैकार करता रैवै।

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