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तड़का : क्या करे `धन्नो’

कविता श्रीवास्तव

‘चल धन्नो… आज बसंती की इज्जत का सवाल है…’ फिल्म `शोले’ का यह डायलॉग उस घोड़ागाड़ी की याद दिला देता है, जिसे चलाकर बसंती गब्बर सिंह के डाकुओं से अपना बचाव करना चाहती है। फिल्म `शोले’ के हर किरदार और हर डायलॉग के लोकप्रिय होने के साथ बसंती की घोड़ी `धन्नो’ का नाम भी लोगों की जुबान पर है। लेकिन अब मुंबई में `धन्नो’ कहीं दिखाई नहीं देती है। एक समय था जब गेट ऑफ इंडिया और तमाम समुद्री तटों पर घोड़ागाड़ी चलती थी। हाल ही में गोराई समुद्री तट पर घोड़ागाड़ी चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। पशु सुरक्षा जरूरी है। लेकिन यादगार उपक्रम भी जीवित रहने चाहिए।
खिलाड़ियों का क्या दोष?
बंगलुरु भगदड़ हादसे में खिलाड़ियों पर भी गाज गिरने लगी है। खबर है कि इस मामले में दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ी विराट कोहली के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। दरअसल, यह हादसा रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के आईपीएल ट्रॉफी जीतने पर टीम के सत्कार में आयोजित समारोह के दौरान हुई। आईपीएल विजेता बनने के बाद खिलाड़ी तो केवल बुलाए जाने पर सत्कार के लिए पहुंचे थे। उनका आयोजन से भला क्या लेना-देना? यदि खिलाड़ी लोगों में लोकप्रिय हैं, जनता उन्हें पहचानती है और उन्हें देखने पहुंच जाती है तो इसमें खिलाड़ियों का क्या दोष है? वहां के आयोजन करने वालों, व्यवस्थापकों और स्थानीय प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार समझा जा सकता है। खिलाड़ियों पर दोष मढ़ने की बात समझ से परे है।
पनीर को पहचानो
लजीज व्यंजनों के चटकारे लेने के चक्कर में हम न जाने क्या-क्या चट कर जाते हैं। पनीर टिक्की, पनीर चिली, पनीर कोफ्ता, पनीर भुर्जी और न जाने क्या-क्या? घर से लेकर रेस्टोरेंट, होटल, शादी-ब्याह के फंक्शन में पनीर के आइटम्स बड़े चाव से खाए जाते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि असली पनीर क्या है? दरअसल, दूध से परंपरागत तरीके से बनाई गई असली पनीर का स्वाद, क्वालिटी और पोषक तत्वों के लिए व्यंजनों में खास महत्व है। लेकिन आजकल नकली पनीर यानी एनालॉग पनीर से भारी मात्रा में डिशेज बन रहे हैं। एनालॉग पनीर मिल्क पाउडर, स्टार्च, पामऑयल और इमल्सिफायर्स से बनाया जाता है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स ऑथॉरिटी ऑफ इंडिया ने एनालॉग पनीर बेचने की इजाजत दी है। लेकिन पनीर विक्रेताओं और पनीर से व्यंजन बनाने वालों को यह बताना अनिवार्य है कि वे कौन-सा पनीर दे रहे हैं। नियमनुसार, उन्हें यह बताना चाहिए कि वे एनालॉग पनीर बेच रहे हैं या परंपरागत पनीर। दरअसल, एनालॉग पनीर और असली पनीर खाने और दिखने में एक जैसे लगते हैं। इसी वजह से पनीर की जगह लोगों को एक तरह से रोग भी परोसा जा रहा है। यह स्वास्थ्य पर निश्चित रूप से प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। इसकी जनजागृति के लिए अब कई कंज्यूमर संस्थाएं सक्रिय हुई हैं। इस संबंध में स्पष्ट निर्देश है कि विक्रेता यह स्पष्ट करें कि वे असली पनीर बेच रहे हैं या एनालॉग पनीर। हमें भी इसकी जानकारी होनी चाहिए।

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