-वर्ल्ड क्लास स्टेशन के नाम पर धरोहरों का बलिदान
-शर्मनाक-सीएसएमटी की हेरिटेज गली की कहानी
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) को वर्ल्ड क्लास बनाने के अभियान में भारत की पहली रेल की विरासत को खुलेआम गड्ढे में गिरा दिया गया। २०१८ में शुरू हुई हेरिटेज गली, जो रेलवे के ऐतिहासिक अवशेषों का छोटा सा ओपन-एयर म्यूजियम थी, अब वो बिसार दी गई है। यह विरासत सिर्फ यादों, धूल और कीचड़ में तब्दील हो चुकी है।
इस गली में क्या-क्या नहीं था। रिपोर्ट की मानें तो १९२८ का भाप इंजन जो कुरुदवाड़ी-लातूर बीएलआर पर दौड़ता था, भारत के पहले इलेक्ट्रिक इंजनों में शामिल ईएफ/१ सर लेस्ली विल्सन, १८८० का मैन्युअल फायर इंजन, १९२० का ब्रिटिश मालवाहक डिब्बा, डब्ल्यूसीजी-२ इंजन, एनडीएम१ और जेडडीएम४ए जैसे दुर्लभ डीजल इंजन, पुराना प्रिंटिंग प्रेस, पत्थर तोड़ने वाली मशीन और भाप क्रेन-सब कुछ।
मिट्टी में मिलेंगे या कबाड़ में बिकेंगे
रिपोर्ट की मानें तो रेलवे ने इस पर कहा है कि धरोहरों की मरम्मत वैज्ञानिक तरीकों से की जाएगी और जल्द ही लोनावला में म्यूजियम बनेगा, पर कब तक? तब तक ये ऐतिहासिक इंजन मिट्टी में मिलेंगे या कबाड़ में बिकेंगे, ये कोई नहीं बता पा रहा है। इतिहासकार और रेल प्रेमियों की चिंता जायज है, जब देश की पहली रेल की विरासत के साथ ऐसा हो सकता है, तो कल किसकी बारी है?
बारिश और कीचड़ के हवाले
रेलवे ने इन्हें सहेजने के लिए लोनावला पहुंचा दिया बिना कोई म्यूजियम बनाए। वहां ये सभी अनमोल विरासतें एक खाली प्लॉट में धूप, बारिश और कीचड़ के हवाले कर दी गर्इं। मजेदार बात ये है कि जिन पेड़ों को कोर्ट के आदेश से मेट्रो साइट से यहां लाया गया था, वे भी अब इस बर्बादी का हिस्सा हैं।
