मुख्यपृष्ठस्तंभआउट ऑफ पवेलियन : मंगेतर को छोड़ा, ट्रेनर को पकड़ा

आउट ऑफ पवेलियन : मंगेतर को छोड़ा, ट्रेनर को पकड़ा

अमिताभ श्रीवास्तव

अब ये प्यार का मामला है। मंगेतर ही तो था छोड़ दिया और अपने ट्रेनर को पकड़ लिया। मतलब इश्क करने लग गईं। हालांकि, ये बात कोई बड़ी नहीं होती यदि वो सामान्य लड़की होतीं, वो चूंकि सेलेब्रेटी हैं तो सुर्खियों में छा गईं। जी हां, इंग्लैंड की स्टार फुटबॉल खिलाड़ी मिल्ली ब्राइट अपने मंगेतर को छोड़कर एक विवाहित निजी प्रशिक्षक के प्यार में पड़ गई हैं। ३१ वर्षीय डिफेंडर मिल्ली ने इस सप्ताह यूरो २०२५ से अपना नाम वापस ले लिया था, उन्होंने कहा था कि वह `मानसिक या शारीरिक रूप से १०० प्रतिशत देने में असमर्थ’ हैं। मगर ये कौन जानता था कि वो इश्क फरमा रही है। ये तो अब पता चला है कि उन्होंने अपने होने वाले पति लेवी क्रू को छोड़ दिया है और अपने ही एक फिटनेस ट्रेनर के करीब आ गई हैं। दिलचस्प यह है कि ट्रेनर भी बड़ा शातिर है। बताया जा रहा है कि वो पत्नी को छोड़ कर चेल्सी टीम की कप्तान मिल्ली के आलीशान घर में रहने लगा है। खबरों में है कि यूरो २०२२ और २०२३ में इंग्लैंड को विश्व कप फाइनल में पहुंचाने वाली मिल्ली पिछले साल रेडहिल, सरे में एक जिम में वर्कआउट शुरू करने के बाद ट्रेनर से मिलीं थी। बस इश्क की यहीं से शुरुआत हुई थी। इस वर्ष की शुरुआत में अपने इश्क के चक्कर में वो लेवी से अलग हो गर्इं, और उधर ट्रेनर ने भी अपनी पत्नी से अचानक संबंध तोड़ लिया। मामले को ज्यादा गंभीर नहीं बनाया गया है और माना जा रहा है मिल्ली के मंगेतर ने और उधर ट्रेनर की बीवी ने कोई आपत्ति दर्ज़ नहीं कराई है। इसका मतलब यह है कि अब मिल्ली और ट्रेनर के लिए आसमान साफ है।
सावधान! दिमाग खाने वाले अमीबा का कहर
इस बार टेक्सास में एक और व्यक्ति की मौत नेगलेरिया फाउलेरी नामक हिंसक मस्तिष्क खाने वाले अमीबा से हुई है। इससे पहले मार्च में कराची में एक महिला २०२५ में इसी बीमारी का पहला शिकार बनी थी। सीडीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ७१ वर्षीय सामान्य रूप से स्वस्थ महिला ने टेक्सास के एक शिविर में नाक धोने वाले डिवाइस में नल के पानी का उपयोग किया और इसके चार दिन बाद बुखार, सिरदर्द और मानसिक स्थिति में परिवर्तन जैसे गंभीर न्यूरोलॉजिकल लक्षण अनुभव होने लगे। महिला को दौरे पड़ने लगे और दुख की बात है कि उसके लक्षण शुरू होने के ८ दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई। सीडीसी द्वारा किए गए परीक्षणों से पुष्टि हुई कि उसके मस्तिष्क-मेरु द्रव में एन. फाउलेरी पाया गया था। बस यही है वो अमीबा जो `दिमाग खाने वाला अमीबा’ कहा जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है जो लगभग हमेशा घातक होती है, जिसकी मृत्यु दर लगभग ९८ प्रतिशत है। यह अमीबा झीलों, नदियों और गर्म झरनों जैसे गर्म मीठे पानी के वातावरण में पनपता है, जब दूषित पानी नाक से होकर गुजरता है तो यह शरीर में प्रवेश करता है। सी.डी.सी. के अनुसार, १९६२ से २०२३ के बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका में पी.ए.एम. के १६४ मामले सामने आए थे। इनमें से केवल चार ही जीवित बचे हैं। एक बार अंदर जाने के बाद, अमीबा मस्तिष्क तक पहुंच जाता है, जहां यह मस्तिष्क के ऊतकों को नष्ट कर देता है, जिससे तंत्रिका संबंधी कार्य में तेजी से गिरावट आती है। पीएएम के लक्षण सिरदर्द, बुखार, मितली और उल्टी से शुरू होते हैं, फिर गर्दन में अकड़न, भ्रम, दौरे और मतिभ्रम तक बढ़ जाते हैं और अंतत: कुछ दिनों के भीतर कोमा और मृत्यु की ओर ले जाते हैं।

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