सामना संवाददाता / नई दिल्ली
अमेरिका और रूस के बीच न्यू स्टार्ट ट्रीटी खत्म हो चुकी है, जो कि स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन को लेकर थी। इस ट्रीटी के खत्म होने से वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ट्रीटी खत्म होने से परमाणु युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। गौरतलब हो कि अमेरिका और रूस के बीच यह समझौता २०१० में साइन किया गया था और जिसे २०२६ तक बढ़ाया गया था, लेकिन अब दोनों देशों के बीच यह समझौता खत्म हो चुका है।
रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘दोनों पक्ष अब संधि के प्रावधानों से बंधे नहीं हैं और अपने अगले कदम तय करने के लिए स्वतंत्र हैं।’ मंत्रालय ने कहा कि रूस स्ट्रैटेजिक स्थिति को स्थिर करने के लिए राजनीतिक और राजनयिक प्रयासों के लिए खुला है। मंत्रालय ने आगे कहा, रूस को ५ फरवरी को संधि की समाप्ति के बाद न्यूक्लियर हथियारों की सीमा पर स्वैच्छिक रोक बढ़ाने के रूसी पहल पर संयुक्त राज्य अमेरिका से कोई औपचारिक आधिकारिक जवाब नहीं मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने जनवरी २०२६ में कहा था कि वह इस ट्रीटी के खत्म होने को लेकर टेंशन में नहीं है। ट्रंप ने उम्मीद भी जताई थी कि दोनों पक्ष एक नए समझौते पर पहुंचेंगे।
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वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस चूक को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि यह इतने लंबे समय में पहली बार है कि दोनों देशों के स्ट्रैटेजिक न्यूक्लियर हथियारों पर कोई रोक नहीं है, जिनके पास मिलकर दुनिया के अधिकांश न्यूक्लियर हथियार हैं। गुटेरेस ने दोनों देशों से बातचीत की मेज पर लौटने और जोखिमों को कम करने और सत्यापन योग्य सीमाओं को बहाल करने के लिए एक उत्तराधिकारी ढांचा बनाने का आग्रह किया।
