मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
लखनऊ में इनकम टैक्स विभाग की शिकायत पर 2.75 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी फ्राड पकड़ा गया है। सहायक आयुक्त राज्य कर अभिमन्यु पाठक की तहरीर पर फर्जी फर्म ‘स्वराज ट्रेडर्स’ के जरिए बोगस आईटीसी बेचकर 52 लाख रुपये की टैक्स चोरी करने का मुकदमा दर्ज कराया गया है।
डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि टैक्स चोरी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि 8 अप्रैल 2024 को जीएसटीआईएन लेकर एल्युमिनियम वेस्ट, फेरस वेस्ट, स्क्रैप, ट्यूब पाइप, आयरन और स्टील की बिक्री दिखाने वाली ‘स्वराज ट्रेडर्स’ असल में अस्तित्व में ही नहीं थी। फर्जी किरायानामा लगाकर इसका रजिस्ट्रेशन कराया गया था। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 52 लाख 266 रुपये का टैक्स बोगस आईटीसी के जरिए अन्य फर्मों को बेच दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि ‘स्वराज ट्रेडर्स’ जैसी 15 से अधिक फर्जी फर्में बनाकर एक गिरोह काम कर रहा था। गिरोह में साकेतनगर जूही कालोनी की रहने वाली तबस्सुम उर्फ गुलचमन उर्फ जान्हवी सिंह पत्नी नरेन्द्र सिंह, कल्याणपुर कानपुर के रहने वाले प्रशांत बेन्जवाल (30), इंदिरा नगर सेक्टर-11 के रहने वाले सुमित सौरभ (35) पुत्र जितेन्द्र कुमार और नौबस्ता कानपुर नगर निवासी दौलत राम पुत्र बदलूराम शामिल थे।
इनके द्वारा लालच देकर लोगों के आधार, पैन, बैंक खाते, मोबाइल नंबर और पते लिए जाते थे। गिरोह का सरगना अम्मार अंसारी फर्जी किरायानामा तैयार कर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराता था। फर्म के नाम पर फर्जी जीएसटी-आर1 भरकर आईटीसी जनरेट की जाती थी। प्रशांत एक प्रतिशत कमीशन लेकर फर्जी इनवॉइस बनाता और आईटीसी बेचता था।
जांच में एसएस गैलेक्सी और एसएस एंटरप्राइजेज नाम की फर्मों का भी खुलासा हुआ। इनके मालिक सुमित सौरभ को गिरफ्तार किया गया है। इन फर्मों के जरिए 19 लाख 1 हजार 242 रुपये की जीएसटी चोरी की गई। भुगतान के तौर पर दो साइन किए हुए चेक, एक लाख रुपये नकद और एक लाख रुपये ‘स्वराज ट्रेडर्स’ के खाते में ट्रांसफर किए गए। उस खाते का डेबिट कार्ड प्रशांत और तबस्सुम के पास से बरामद हुआ।
दौलत राम कानपुर में मजदूरी करता है और 20 हजार रुपये के लालच में दस्तावेज उपलब्ध कराता था। तबस्सुम पहले टिफिन सर्विस चलाती थी, लेकिन ज्यादा कमाई के लालच में फर्जी फर्म रजिस्ट्रेशन के खेल में शामिल हो गई। गिरोह में शामिल प्रशांत बेन्जवाल पहले विशाल मेगा मार्ट में कैशियर था, बाद में नौकरी छोड़कर इस गिरोह में शामिल हो गया। फर्जी इनवॉइस और आईटीसी जनरेट करना उसका काम था। विशाल मेगा मार्ट में ही तबस्सुम और प्रशांत की मुलाकात हुई थी।
सुमित सौरभ एक वास्तविक फर्म का मालिक है, जो टैक्स चोरी के लिए बोगस आईटीसी खरीदता था। सीतापुर निवासी अम्मार अंसारी गिरोह का सरगना है और वही फर्जी किरायानामा तथा जीएसटी रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया संभालता था। वह पहले भी जीएसटी फ्राड के मामले में जेल जा चुका है। फिलहाल वह बाहर है और उसकी तलाश की जा रही है।
पूछताछ में तबस्सुम ने बताया कि उसकी पहली शादी एजाज अहमद से हुई थी, जिसने उसे छोड़ दिया था। इसके बाद उसने कानपुर में नरेन्द्र से शादी की, लेकिन 2017 में उसके पहले से शादीशुदा होने की जानकारी मिलने पर उसे भी छोड़ दिया। वर्ष 2020 में कानपुर स्थित वी मार्ट में कैशियर प्रशांत से उसकी पहचान हुई। प्रशांत का वेतन मात्र 10 हजार रुपये था। दोनों साथ रहने लगे और टिफिन सर्विस शुरू की, लेकिन कम आमदनी के चलते कम समय में ज्यादा पैसा कमाने की योजना बनाई।
इस दौरान दोनों ने अम्मार अंसारी से संपर्क किया और फर्जी जीएसटी के जरिए आईटीसी बेचने की योजना बनाई। डीसीपी ने बताया कि तबस्सुम और प्रशांत ऐसे लोगों की तलाश करते थे, जो फर्जी फर्म बनवाने के लिए अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर और बैंक खाते उपलब्ध करा दें। ये दस्तावेज अम्मार को सौंप दिए जाते थे, जिसके जरिए फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराया जाता था। प्रत्येक फर्म के एवज में तबस्सुम और प्रशांत को एक लाख रुपये मिलते थे। इन फर्मों में से एक का मालिक दौलत राम को बनाया गया था।
