सामना संवाददाता / मुंबई
कोटक एजुकेशन फाउंडेशन (KEF) ने भारत में शिक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को मजबूत और विस्तारित करने के लिए भारतजेन टेक्नोलॉजी फाउंडेशन के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस रणनीतिक सहयोग का उद्देश्य स्वदेशी, बहुभाषी एआई समाधान विकसित और लागू करना है, जो सीखने के परिणामों में सुधार करें तथा पूरे भारत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच बढ़ाएँ।
इस एमओयू पर हस्ताक्षर कोटक एजुकेशन फाउंडेशन के सीईओ गणेश राजा, सीओओ (एजुकेशन) जयश्री रमेश और डायरेक्टर (एजुकेशन) कविता संघवी की उपस्थिति में हुए। वहीं भारतजेन टेक्नोलॉजी फाउंडेशन की ओर से सीईओ ऋषि बहल, प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर गणेश रामकृष्णन, वीपी (ऑपरेशंस) अमोल गीते और सीनियर साइंटिस्ट वेंकटापति उपस्थित थे।
इस सहयोग के माध्यम से KEF और भारतजेन निम्नलिखित लक्ष्यों हेतु एक रणनीतिक ढांचा स्थापित करेंगे:
* शिक्षा में एआई-आधारित समाधानों तक पहुँच का विस्तार
* KEF के शैक्षणिक कार्यक्रमों के अनुरूप स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करना
* कक्षाओं में एआई समाधान बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए KEF-नेतृत्व वाली पहुंच और क्रियान्वयन सुनिश्चित करना
इस साझेदारी के अंतर्गत कार्यक्षेत्र में शामिल हैं:
* सतत और अनुकूलित सीखने के समर्थन हेतु एआई-सक्षम मूल्यांकन एवं फीडबैक प्रणाली
* बहुभाषी सामग्री वितरण और स्थानीय भाषाओं का समर्थन, जिससे शिक्षा अधिक समावेशी और सुलभ बने
* कक्षा की प्रभावशीलता बढ़ाने हेतु अत्यधिक वैयक्तिकृत सीखने और शिक्षक सहायता उपकरण
* निर्णय-निर्माण को सशक्त करने और सीखने के परिणामों में सुधार के लिए डेटा-आधारित अंतर्दृष्टि
कोटक एजुकेशन फाउंडेशन के सीईओ श्री गणेश राजा ने कहा,
“यह साझेदारी शिक्षा में भारत-केंद्रित, विस्तार योग्य एआई पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है—जो शिक्षकों को सशक्त बनाए, विद्यार्थियों के सीखने को बेहतर करे और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाए। तकनीकी नवाचार को जमीनी स्तर पर मजबूत क्रियान्वयन के साथ जोड़कर हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई समाधान देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में शिक्षकों और छात्रों के लिए सुलभ, समावेशी और प्रभावी बनें।”
भारतजेन के सीईओ श्री ऋषि बहल ने कहा, “भारतजेन में हम ऐसे संप्रभु मूलभूत मॉडल और एआई समाधान विकसित कर रहे हैं जो शिक्षा संबंधी चुनौतियों का बड़े पैमाने पर समाधान करने की भारत की क्षमता को मजबूत करें। हमारा कार्य हमारी भाषाओं, हमारी कक्षाओं और हमारे स्थानीय संदर्भों में निहित है।”
