– सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
– हादसे के बाद भी नहीं जागी सरकार
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मुलुंड में पैरापेट दीवार गिरने से हुई मौत के बाद भी मेट्रो लाइन-४ पर सुरक्षा का संकट खत्म होता नहीं दिख रहा। हादसे की धूल अभी बैठी भी नहीं थी कि ठाणे के माजीवाड़ा, कासारवडवली और आसपास के इलाकों में खंभों व जॉइंट्स पर कथित दरारों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आ गईं। इन तस्वीरों ने साफ कर दिया कि जनता के मन में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा नहीं, बल्कि डगमगा गया है। कुल मिलाकर निर्माणाधीन मेट्रो लाइन-४ को लेकर सुरक्षा पर गंभीर सवाल फिर खड़े हो गए हैं। इसी के साथ ही हादसे के बाद भी न जागने वाली महायुति सरकार और एमएमआरडीए की कार्यप्रणाली पर नेटीजंस का जमकर गुस्सा फूट पड़ा।

मुलुंड हादसे के बाद से लगातार वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आ रही हैं, जिनमें नागरिक मेट्रो कॉरिडोर के अलग-अलग हिस्सों में दरारों और संभावित संरचनात्मक खामियों को लेकर चिंता जता रहे हैं। नेटिजन सचिन सिंगारे ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर कई फोटो-वीडियो साझा किए हैं, जिनमें निर्माणाधीन विजय गार्डन मेट्रो स्टेशन के पास, कॉसमॉस ज्वेल्स और कासारवडवली पुलिस स्टेशन के नजदीक जॉइंट्स में दरार जैसी रेखाएं दिखने की जानकारी साझा की है। उनका कहना है कि यदि ये सामान्य निर्माण जोड़ हैं तो स्पष्ट किया जाए। लेकिन यदि वास्तविक दरारें हैं तो तत्काल मरम्मत की जाए। उन्होंने मेट्रो लाइन-४ और कापुरबावडी के सामने सिने वंडर मॉल क्षेत्र की भी जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि संभावित दोषों को तुरंत ठीक किया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले कार्रवाई हो सके। उन्होंने कासारवडवली के पूरे हिस्से का तत्काल निरीक्षण करने की भी अपील की है, जिससे कोई अप्रिय घटना न हो।
भारी खर्च, घटिया निर्माण!
लोगों का सवाल, ‘क्या किसी नए हादसे का इंतजार किया जा रहा है?’
मेट्रो-४ की घटिया गुणवता व निर्माण सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। लगातार सामने आ रही शिकायतों और वायरल हो रहे वीडियो ने परियोजना की निगरानी, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा इंतजामों पर फिर से बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब नागरिक खुलकर पूछ रहे हैं कि क्या संभावित खामियों को समय रहते सुधारा जाएगा या फिर किसी नए हादसे का इंतजार किया जाएगा?
नेटीजंस का फूटा गुस्सा
नेटीजंस अभिजीत दत्त रॉय ने एक्स पर लिखा कि अब सभी परियोजनाओं का तीसरे पक्ष से ऑडिट होना चाहिए, क्योंकि मौजूदा सुरक्षा स्तर किसी भी मानक के अनुसार स्वीकार्य नहीं है। माही सोनी ने टिप्पणी की है कि गायमुख-माजीवाड़ा और मुलुंड एलबीएस मार्ग जोखिम भरा लगता है। उन्होंने सवाल किया है कि भारत में निर्माण गुणवत्ता दुबई-कतर जैसी क्यों नहीं हो सकती। श्रीप्रसाद राव ने खराब रखरखाव, किनारों पर पड़े मलबे और कासारवडवली-ओवला स्टेशनों के अधूरे काम पर नाराजगी जताई। साथ ही परियोजना की धीमी गति पर सवाल उठाए। पंकज सपकाले ने इंजीनियरिंग गुणवत्ता और एमएमआरडीए की जांच प्रणाली पर सवाल करते हुए कहा कि अक्सर खराब गुणवत्ता का पता दुर्घटना के बाद ही चलता है। विजय बसौतिया ने आरोप लगाया कि भारी खर्च के बावजूद काम में जवाबदेही नहीं दिख रही और लापरवाही का माहौल नजर आता है।
एमएमआरडीए की सफाई
एमएमआरडीए की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया है कि इस स्थान का परियोजना टीम द्वारा निरीक्षण कर लिया गया है। यहां प्रीकास्ट पैरापेट दीवार लगभग पांच महीने पहले पूरी हो चुकी है और संरचना स्थिर है। यहां दिखाई दे रही शटरिंग एक अस्थायी ढांचा है, जिसका उपयोग कंक्रीट को जमने और पर्याप्त मजबूती प्राप्त करने तक सहारा देने के लिए किया जाता है। इसे निर्धारित इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं के अनुसार, ठीक से एंकर किया गया है और कंक्रीट के आवश्यक मजबूती स्तर पर पहुंचने के बाद इसे हटा दिया जाएगा। कार्य तकनीकी निगरानी में किया जा रहा है।
