– परमाणु चलित विमान वाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड के ९०ज्ञ् टॉयलेट खराब
– फारिग होने के लिए कई सैनिकों का घंटों बाद लग रहा नंबर
– बार-बार की मरम्मत के बावजूद ठीक नहीं हो रही शौचालयों की खराबी
सामना संवाददाता / मुंबई
ईरान पर अमेरिकी हमले की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। अमेरिका उसे चारों तरफ से घेर रहा है। अमेरिकी युद्धपोत और विमान वाहक पोत खाड़ी की ओर पहुंच रहे हैं। मगर इस बीच एक गड़बड़ी की खबर है। परमाणु चलित अमेरिकी विमान वाहक पोत फोर्ड में नौसैनिकों के शौच के वांदे हो गए हैं। ऐसे में ईरानी लोग सोशल मीडिया पर अमेरिका की खिल्ली उड़ाते हुए कह रहे हैं कि जब ठीक से शौच ही नहीं कर पा रहे हैं तो लड़ेंगे क्या खाक!
दरअसल, युद्ध की तैयारी में मिडिल ईस्ट पहुंच रहे अमेरिका के दूसरे एयरक्राफ्ट वैâरियर यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड के सामने कई दिक्कतें आ रही हैं। सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि विमान वाहक युद्धपोत पर तैनात करीब ४,००० सैनिकों को टॉयलेट की कमी और चोक सीवेज से जूझना पड़ रहा है। इससे उनकी सेहत बिगड़ने लगी है।
१३ अरब डॉलर का पोत
अमेरिकी शक्ति प्रदर्शन के लिए डिजाइन किया गया इतिहास का सबसे महंगा विमानवाहक पोत अपने ही क्रू के लिए बुनियादी स्वच्छता सुविधाएं प्रदान नहीं कर पा रहा है। करीब १३ अरब डॉलर यानी १.१८ लाख करोड़ रुपए की लागत से बने इस जहाज पर ४,६०० नाविकों को रखने की क्षमता है। मगर इसमें काफी शौचालय खराब पड़े हैं। यह समस्या जहाज के वैक्यूम कलेक्शन, होल्डिंग एंड ट्रांसफर सिस्टम से जुड़ी है, जो क्रूज जहाजों से प्रेरित है और कम पानी का उपयोग करता है।
ईरान से वॉर नहीं है आसान…
शौचालय की समस्या से जूझ
रहे हैं अमेरिकी नौसैनिक!
अमेरिका के लिए ईरान के साथ वॉर आसान नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिकी नौसैनिक शौचालय की समस्या से जूझ रहे हैं। अमेरिका के दूसरे एयरक्राफ्ट वैâरियर यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड के सामने कई दिक्कतें आ रही हैं। इतिहास का सबसे महंगा विमानवाहक पोत अपने ही क्रू के लिए बुनियादी स्वच्छता सुविधाएं प्रदान नहीं कर पा रहा है। पोत के ९० फीसदी शौचालय खराब हैं और नौसैनिकों को फारिग होने में दिक्कतें आ रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, २०२३ से अब तक ४२ बार शौचालयों की मरम्मत के लिए बाहरी मदद मांगी गई है। २०२५ में ३२ बार शिकायत की गई। एक ई-मेल में चार दिनों में २०५ ब्रेकडाउन दर्ज किए गए हैं। इसके बावजूद इस समस्या को दूर नहीं किया जा सका है। इंजीनियरिंग टीम को १९-१९ घंटे की शिफ्ट करनी पड़ रही है। ऐसे में कई बार ९० फीसदी शौचालय काम नहीं करते, जिससे नाविकों को ४५ मिनट तक कतार में इंतजार करना पड़ रहा है। ट्रंप प्रशासन के ईरान पर हमले की धमकियों के बीच टॉयलेट क्राइसिस अमेरिकी नौसेना की तैयारियों पर सवाल उठा रहा है। दुनिया का सबसे शक्तिशाली विमानवाहक पोत दुश्मन से पहले अपने शौचालयों से जूझ रहा है। युद्ध की तैयारियों के बीच अमेरिकी नौसैनिकों के लिए ये बड़ी समस्या है। ऐसे में उनकी तबीयत खराब होने के कारण ईरान पर हमला करने की अमेरिकी क्षमता पर असर पड़ सकता है।
