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शिव को प्रिय रुद्राष्टकम्

 शीतल अवस्थी

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई उपाय करते हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अनेक मंत्र, स्तुति व स्तोत्रों की रचना की गई है। इनके जप व गान से भगवान शिव अति प्रसन्न होते हैं। प्रति दिन इन स्तुति व स्तोत्रों का पाठ करने से सभी समस्याओं का अंत भी हो जाता है। माना जाता है कि शिव रुद्राष्टकम् शिवजी को काफी प्रिय है। इसलिए शिव रुद्राष्टकम् का पाठ अवश्य करें।
शिव रुद्राष्टकम्
नमामीशमीशान निर्वाण रूपं,
विभुं व्यापकं ब्रह्म वेद: स्वरूपम्।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं,
चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम्।।
निराकार मोंकार मूलं तुरीयं,
गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम्।
करालं महाकाल कालं कृपालं,
गुणागार संसार पारं नतोऽहम्।।
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं,
मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम्।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा,
लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा।।
चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं,
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्।
मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं,
प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि।।
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं,
अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम्।
त्रय:शूल निर्मूलनं शूलपाणिं,
भजेऽहम् भवानीपतिं भाव गम्यम्।।
कलातीत-कल्याण-कल्पांतकारी,
सदा सज्जनानन्द दातापुरारी।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी,
प्रसीद-प्रसीद प्रभो मन्माथारी।।
न यावद् उमानाथ पादारविन्दं,
भजंतीह लोके परे वा नाराणम्।
न तावत्सुखं शांति संताप नाशं,
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम्।।
न जानामि योगं जपं नैव पूजा,
न तोऽहम् सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यम्।
जरा जन्म दु:खौद्य तातप्यमानं,
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो।।
रूद्राष्टक इदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये,
ये पठंति नरा भत्तäया तेषां शम्भु प्रसीदति।।

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