धीरज फूलमती सिंह
मुंबई
भारत की बात करें तो यहां हर एक लाख की जनसंख्या पर ७० से ८० व्यक्ति कैंसर से पीड़ित हो सकते हैं। भारत में कैंसर से मरने वाले व्यक्तियों में ३४ प्रतिशत लोग धूम्रपान, तंबाकू, शराब के सेवन करने वाले लोग है। एक सामान्य सोच है कि अगर हम बीड़ी, सिगरेट, तंबाखू का सेवन नहीं करते हैं तो हमें कैंसर नहीं हो सकता है, जो कि हमारी गलतफहमी है और कुछ नहीं। दुनियाभर में सबसे ज्यादा चाय भारत में पी जाती है। एक औसत व्यक्ति को दिन में सिर्फ दो बार ही चाय पीनी चाहिए, दो से ज्यादा चाय पीने वाले अधिकाश लोगों में अपच की शिकायत होती हैं, उनका हाजमा खराब हो जाता है, इस वजह से अन्न नली में अल्सर की शिकायत उभर आती है। अल्सर का इलाज न होने पर यह कैंसर का रूप भी ले सकता है।
बहुत दिनों तक गॉल ब्लैडर की पथरी का इलाज न हो तो यह भी कैंसर में परिवर्तित हो सकती है। भारतीय महिलाओं में गॉल ब्लैडर का कैंसर सामान्य है तो पुरूषों में लाल मांस खाने की आदत वैंâसर का कारण बनती है। भारतीय गांव देहात के पुरूषों को नंगे या अंधनंगे बदन घूमने-फिरने और काम करने की आदत होती है। इस वजह से वे सूर्य के कठोर व तेज प्रकाश के सीधे संपर्क में रहते हैं। भोर में सूर्य की किरणें भले ही विटामिन-डी का सबसे अच्छा श्रोत हों पर चिलचिलाती धूप वैंâसर का बहुत बडा कारण होती है। वहीं शहरी महिलाओं में प्रदूषण की वजह से त्वचा का वैंâसर होने की संभावना बनी रहती है। भोजन को तीखा और चटकदार बनाने के लिए हरी मिर्च या काली मिर्च का उपयोग बहुत अच्छा होता है लेकिन अगर हम लाल सूखी मिर्च या उसके मोटे बुरादे का उपयोग करते है तो हम जाने-अंजाने कैंसर को निमंत्रण दे रहे होते है। प्रोसेस्ड फूड्स शरीर में कैंसर विकसित होने का एक कारण हो सकता है। हम बचा-खुचा और बासी खाने के भी बहुत हिमायती होते हैं। डायबिटीज में बासी रोटी खाने के बहुत फायदे बताते हैं, बासी बचे चावल से नए-नए व्यजन बनाने के गुर सिखाते हैं। आये दिन बासी बचा-खुचा भोजन करना भी कैंसर को आमंत्रित करने के लिए काफी है।
स्वभाव से आलसी होने, कम चलने -फिरने, काम कम करने आदि से शरीर में सूजन हो जाती है, जो प्राकृतिक मोटापा भले न हो, मगर मोटापा जैसा ही होता है, जो शरीर में आंतों और स्तन वैंâसर की संभावना को बढ़ा सकता है। आबादी के साथ असुरक्षित मैथुन करने वालों में भी हम आगे है। असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने की वजह से होने वाले कैंसर में भारत आज शीर्ष पर है। मल्टीपल पार्टनर्स की वजह से सिर्फ एड्स का ही नहीं पुरुषों में शिश्न नली के कैंसर का भी डर होता है। आम तौर पर लोगों को खाने के बाद कुल्ला न करने की आदत होती है, अंदरूनी मुंह साफ नहीं रखते, दाढ व मसूड़ों में सूजन और बदबू आती रहती है। लंबे समय तक यह स्थिति मुंह के कैंसर का कारण बन सकती है। अनियंत्रित नाखून चबाने की आदत भी किसी को मुंह के कैंसर का मरीज बना सकती है। सोने से पहले फोन, कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से रात में किसी भी प्रकार की रोशनी कैंसर, मधुमेह, मोटापा और हृदय रोगों से जुड़ी हो सकती है। इसलिए सोने से पहले खुद को शांत रखें।
जीवनशैली का हमारे स्वास्थ्य पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह का प्रभाव पड़ता है और यह हमारी आदतों पर निर्भर करता है। अच्छी आदतें रखने वाला व्यक्ति जीवनभर स्वस्थ और तंदुरुस्त रहता है, वहीं बुरी आदतों वाले लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं और उनका जीवन समय के साथ कम हो जाता है।
भारतीय महिलाओं में गॉल ब्लैडर का कैंसर सामान्य है तो पुरूषों में लाल मांस खाने की आदत कैंसर का कारण बनती है। भारतीय गांव देहात के पुरूषों को नंगे या अंधनंगे बदन घूमने-फिरने और काम करने की आदत होती है। इस वजह से वे सूर्य के कठोर व तेज प्रकाश के सीधे संपर्क में रहते हैं। भोर में सूर्य की किरणें भले ही विटामिन-डी का सबसे अच्छा श्रोत हों पर चिलचिलाती धूप कैंसर का बहुत बडा कारण होती है।
किसी को डराने के लिए ‘कैंसर’ का बस नाम ही काफी है। दुनियाभर में मौत का दूसरा सबसे प्रमुख कारण कैंसर है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, आज के समय में हर वर्ष १० मिलियन कैंसर के नए मामले सामने आते हैं। क्या आप जानते है कि विश्व में इस समय कुल ४ करोड़ लोग कैंसर ग्रस्त हैं, इनमें हर वर्ष लगभग एक करोड व्यक्ति और जुड़ जाते हैं। हर वर्ष अनुमानित ६० लाख व्यक्तियों की कैंसर के कारण मृत्यु हो जाती है।
