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‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में भी बच्चों की सुरक्षा पर कंसेंट और सेफ टच का मिलेगा संदेश

सोम मिश्रा “शिवम”

छोटे पर्दे पर स्टार प्लस ने वर्षों से ऐसी कहानियां पेश की हैं जो भावनाओं और गहरे ड्रामे से भरी होती हैं। इसके सबसे यादगार शो में से एक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ केवल एक पारिवारिक धारावाहिक नहीं रहा, बल्कि यह ऐसा शो बना जिसने वास्तविक जीवन की समस्याओं और महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों को सहज तरीके से सामने रखा। इस धारावाहिक ने ऐसे किरदारों के माध्यम से संवाद शुरू करने में मदद की, जिनसे दर्शक खुद को गहराई से जुड़ा हुआ महसूस करते थे।

मौजूदा ट्रैक में किडनैपिंग की घटना के बाद परी की बेटी गरिमा के साथ तुलसी की बातचीत को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ दिखाया गया है। उस सदमे को केवल कहानी का हिस्सा बनाकर आगे बढ़ जाने के बजाय, शो में यह दर्शाया गया है कि तुलसी किस तरह गरिमा को “गुड टच” और “बैड टच” के बीच का अंतर प्यार और समझदारी के साथ समझाती है। साथ ही बच्चे को यह भरोसा भी दिलाती है कि अपनी बात कहना न केवल सही है बल्कि बेहद जरूरी भी है।

यह दृश्य भले ही शांत दिखाई देता है, लेकिन इसका संदेश बहुत प्रभावशाली है। यह कहानी को केवल डर और सदमे से आगे ले जाकर जागरूकता और साहस की दिशा में मोड़ देता है। करोड़ों दर्शकों तक पहुंचने वाले इस लोकप्रिय शो में ऐसे संवेदनशील विषय को उठाने पर बात करते हुए प्रोड्यूसर एकता कपूर ने कहा कि जब तुलसी जैसे किरदार स्क्रीन पर इन मुद्दों पर बात करते हैं तो इससे घरों में माता-पिता को भी अपने बच्चों के साथ जरूरी बातचीत शुरू करने की प्रेरणा मिलती है।

एकता कपूर ने कहा, “क्योंकि सास भी कभी बहू थी के साथ हमें यह महसूस हुआ कि विरानी परिवार पर दर्शकों का जो भरोसा है, उसके साथ वास्तविकता को दिखाने की एक बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के इर्द-गिर्द गरिमा का ट्रैक लाना केवल कहानी का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह उस लंबी चुप्पी को तोड़ने का प्रयास था जो समाज में अक्सर ऐसे विषयों पर बनी रहती है। जब तुलसी देशभर के घरों के ड्राइंग रूम तक पहुंचकर शारीरिक सीमाओं के बारे में बात करती है, तो यह माता-पिता को भी अपने बच्चों से इस विषय पर खुलकर बातचीत करने का साहस देता है।”

इस संवेदनशील ट्रैक के पीछे के उद्देश्य पर जोर देते हुए एकता कपूर ने यह भी कहा कि जब टेलीविजन का उपयोग सोच-समझकर किया जाता है तो यह जागरूकता फैलाने का एक मजबूत माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा, “टीवी के जरिए बच्चों को सहमति और सुरक्षित स्पर्श के बारे में सिखाना उन्हें बिना डरे अपनी बात कहने और गलत को पहचानने की हिम्मत देता है। यदि यह कहानी किसी एक घर में भी खुली बातचीत की शुरुआत कर देती है और किसी बच्चे को सुरक्षित महसूस कराती है, तो यह शो केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता बल्कि अपने सामाजिक उद्देश्य को भी पूरा करता है।”

यह ट्रैक अब टेलीविजन स्क्रीन से आगे बढ़कर चर्चा का विषय बन चुका है। इससे दर्शकों को यह याद दिलाया जा रहा है कि सार्थक कहानियां वास्तविक जीवन में भी बदलाव ला सकती हैं। सुविधा के बजाय साहस को चुनते हुए मेकर्स ने यह साबित किया है कि यदि ऐसे मुद्दों को संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो वे जागरूकता बढ़ाने, संवाद शुरू करने और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यह धारावाहिक हर रोज रात 10:30 बजे स्टार प्लस पर प्रसारित किया जा रहा है।

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