मुख्यपृष्ठनए समाचारकन्फ्यूज किया रे...विदेशी मुद्रा में चलेंगे देशी प्रोजेक्ट्स!

कन्फ्यूज किया रे…विदेशी मुद्रा में चलेंगे देशी प्रोजेक्ट्स!

– डॉलर में बताया परियोजनाओं का खर्च

– २०२६ का बजट, २०४७ का सपना

रामदिनेश यादव / मुंबई

महायुति सरकार ने कल २०२६-२७ का बजट पेश किया। इस बजट में बढ़चढ़ कर बड़े पैमाने पर घोषणाएं की गई हैं। जनता का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाकर २० साल बाद २०४७ के सपने दिखाए गए हैं। सबसे अहम बात यह है कि सरकार ने देशी प्रोजेक्ट्स का खर्च बताने के लिए विदेशी मुद्रा डॉलर का सहारा लिया है।
इसे विकसित महाराष्ट्र का नाम दिया गया है। यह बजट सरकार की सालाना आमदनी और खर्च के लेखाजोखा से ज्यादा सपनों का ड्राफ्ट प्रतीत होता है।
५ ट्रिलियन डॉलर का सपना
बजट में वर्ष २०४७ तक राज्य के बजट को ही ५ ट्रिलियन डॉलर्स में आंका है। कृषि जीडीपी, उद्योग, सेवा क्षेत्र से जुड़े प्रस्ताव मे आंकड़े रुपए में नहीं, बल्कि डॉलर्स में दिए गए हैं। आश्चर्य की बात यह है कि हिंदुस्थान में बजट में रुपए का उल्लेख होना चाहिए, ताकि जनता को आसानी से समझ में आए, लेकिन यहां महायुति सरकार ने डॉलर का उपयोग जमकर किया है।
डॉलर में कन्फ्यूज हो जाएंगे किसान!
राज्य के बजट में कृषि जीडीपी के लिए रुपए की जगह डॉलर का उपयोग किया गया है। जैसे कृषि जीडीपी को २०४७ तक ५५ अरब से बढ़ाकर ५०० अरब डॉलर तक ले जाने का उद्देश्य बताया है। अब किसानों को यह समझ में नहीं आएगा कि एक अरब डॉलर का मतलब कितने करोड़ रुपए होता है।
इसी के साथ उद्योग क्षेत्र को भी २०४७ तक १३० अरब से १,५०० अरब डॉलर तक ले जाने का उद्देश्य सुनिश्चित किया है। मुंबई महानगर प्रदेश की क्षमता १४० अरब से बढ़ाकर ३०० अरब डॉलर करना लक्ष्य है। सेवा क्षेत्र को भी ३१२ अरब डॉलर से बढ़ाकर ३,००० अब डॉलर तक ले जाने का सपना दिखाया है। इस पूरे बजट में जनता को भ्रमित करने का काम किया गया है। यह बजट २०२६-२७ के लिए है तो इस बजट में एक साल की प्रगति की बात के बजाय २० साल के बाद की कहानी गढ़ी गई है, जिसके चलते बजट के कई मुद्दों को समझना आम जनता के लिए मुश्किल हो रहा है। राज्य के शहरी क्षेत्र के विकास के लिए २०४७ की बात की गई है।

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