मुख्यपृष्ठनए समाचारअब हिंदुस्थान की नीति वॉशिंगटन तय करेगा क्या?

अब हिंदुस्थान की नीति वॉशिंगटन तय करेगा क्या?

-रूस से तेल खरीद पर ३० दिन की शर्त से भड़का विपक्ष

-वडेट्टीवार, दमानिया और आंबेडकर का केंद्र पर हमला

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका द्वारा ३० दिन की शर्त लगाए जाने के मुद्दे पर देश की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष ने इसे हिंदुस्थान की संप्रभुता और विदेश नीति से जुड़ा गंभीर सवाल बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया और वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने केंद्र पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि क्या अब हिंदुस्थान की ऊर्जा और विदेश नीति वॉशिंगटन तय करेगा?
विपक्षी नेताओं ने कहा कि रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी शर्तें स्वीकार करना देश के स्वाभिमान से समझौता है और इससे यह संदेश जाता है कि हिंदुस्थान अपने रणनीतिक पैâसलों में स्वतंत्र नहीं है। नेताओं ने चेतावनी दी कि देश का स्वाभिमान किसी भी वैश्विक दबाव के आगे दांव पर नहीं लगाया जाना चाहिए। दुनिया में इस समय तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। ईरान और इजराइल के युद्ध के कारण खाड़ी देशों में युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है। इसमें अमेरिका का हस्तक्षेप भी बना हुआ है। इसी बीच ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी दूतावासों और तेल कंपनियों पर हमले शुरू कर दिए हैं। इसके कारण तेल की कमी का असर अन्य देशों के साथ हिंदुस्थान में भी कुछ हद तक महसूस किया जा रहा है। इसी बीच अमेरिका ने कहा है कि हिंदुस्थान, रूस से केवल ३० दिनों तक ही तेल खरीद सकता है।
अमेरिका के दबाव में
प्रकाश आंबेडकर ने ट्वीट कर पीएम मोदी से सवाल किया कि क्या भारत को अपने व्यापार समझौतों और विदेश आर्थिक नीतियों में स्वायत्तता नहीं है? उन्होंने पूछा कि क्या भारत अमेरिका का ५१वां राज्य बन गया है? उन्होंने आरोप लगाया कि आज भाजपा अमेरिका के दबाव में काम कर रही है।
१४२ करोड़ का स्वाभिमान इतना सस्ता?
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने भी ट्वीट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि क्या १४२ करोड़ भारतीयों का स्वाभिमान इतना सस्ता है? उन्होंने सरकार से अपील की कि देश का स्वाभिमान गिरवी न रखा जाए। वडेट्टीवार ने कहा कि हिंदुस्थान एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है, किसी की कॉलोनी नहीं।

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