-कुल खर्च: ७,६९,४६७ करोड़ रुपए
-राजस्व आय: ६,१६,६५१ करोड़ रुपए
-कुल वित्तीय घाटा: १,५०,४९१ करोड़ रुपए
राजन पारकर / मुंबई
महाराष्ट्र विधानसभा में मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने २०२६-२०२७ का बजट पेश किया। सरकार ने इस बजट को ‘विकसित महाराष्ट्र २०४७’ के सपनों से जोड़ा है, लेकिन बजट के आंकड़े यह भी बता रहे हैं कि विकास के नारों के पीछे खजाने की हालत उतनी मजबूत नहीं है, जितनी दिखाई जा रही है। सरकार का यह बजट कुल डेढ़ लाख करोड़ रुपए के घाटे का है।
सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए ७,६९,४६७ करोड़ रुपए के कुल खर्च का प्रावधान रखा है। वहीं अनुमान के अनुसार, राज्य की राजस्व आय ६,१६,६५१ करोड़ रुपए रहने वाली है। इसका सीधा मतलब है कि राज्य का खजाना भारी घाटे में हैं। पिछले वर्ष के आंकड़े भी बहुत अलग तस्वीर नहीं दिखाते। वर्ष २०२५-२६ के बजट में राजस्व कमी ४५,८९२ करोड़ रुपए आंकी गई थी, जो संशोधित अनुमान में ३७,०५५ करोड़ रुपए रही। अब नए बजट में फिर से घाटे का आंकड़ा बढ़ गया है। इसी प्रकार राज्य की राजकोषीय कमी लगभग १,५०,४११ करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि राजकोषीय उत्तरदायित्व और वित्तीय प्रबंधन कानून के अनुसार यह कमी राज्य की कुल अर्थव्यवस्था के तीन प्रतिशत से कम रखी गई है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर कर्ज और खर्च को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
खर्च में बढ़ोतरी
वार्षिक योजना के तहत भी खर्च में बढ़ोतरी का रास्ता चुना गया है। राज्य स्तर की सामान्य योजना १,९०,२४२ करोड़ रुपए से बढ़ाकर २,०८,८८६ करोड़ रुपए प्रस्तावित की गई है। अनुसूचित जाति घटक कार्यक्रम के लिए २३,१५० करोड़ रुपए, आदिवासी घटक कार्यक्रम के लिए २१,७२३ करोड़ रुपए और जिला वार्षिक योजनाओं के लिए २१,८६७ करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है।
सवालों के घेरे में आर्थिक नीति
सरकार ने विकसित महाराष्ट्र २०४७ का नारा दिया, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या केवल घोषणाओं और बढ़ते खर्च के सहारे यह सपना पूरा हो पाएगा। किसानों की बदहाल स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई के बीच यह बजट एक बार फिर वही पुराना सवाल खड़ा करता है कि विकास के दावे जमीन पर कितने सच साबित होंगे? कुल मिलाकर यह बजट कागज पर विकास की बड़ी तस्वीर दिखाता है, लेकिन खजाने में बढ़ते घाटे की हकीकत सरकार की आर्थिक नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
