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बजट सत्र में सत्ता पक्ष कमजोर…सदन में नहीं, तो फिर कहां हैं जनाब?

– गायब मंत्री-विधायकों से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नाराज

-गैरहाजिर रहनेवाले नेताओं से रविंद्र चव्हाण मांगेंगे जवाब

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र के बजट सत्र के बीच भाजपा के भीतर अनुशासन और सक्रियता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विधानसभा में सत्ताधारी भाजपा के कई विधायक और मंत्री लगातार गैरहाजिर रहने से प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण नाराज बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे ने अब भाजपा के अंदरूनी मतभेद को खुलकर सामने ला दिया है। राज्य का बजट सत्र जारी है, लेकिन सत्ता पक्ष के कई मंत्री और विधायक ही सदन से नदारद रहने लगे हैं। इसका सीधा असर यह हो रहा है कि जब विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करता है या विधायक अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर लक्षवेधी प्रस्ताव रखते हैं, तब भाजपा की उपस्थिति कमजोर दिखाई देती है। इससे सरकार की राजनीतिक छवि पर भी असर पड़ने की चर्चा है। इसी पृष्ठभूमि में प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने पार्टी के मंत्रियों और विधायकों की बैठक बुलाने का पैâसला किया है। बताया जा रहा है कि इन बैठकों में गैरहाजिर रहने वाले नेताओं से सीधे जवाब मांगे जाएंगे। मंगलवार को मराठवाड़ा, उत्तर महाराष्ट्र और विदर्भ के सभी भाजपा विधायकों और मंत्रियों की बैठक होगी, जबकि बुधवार को पश्चिम महाराष्ट्र, ठाणे-कोकण और मुंबई क्षेत्र के नेताओं को बुलाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में प्रदेश नेतृत्व विधायकों और मंत्रियों को सत्र के दौरान अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के लिए कड़े निर्देश दे सकता है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले भी इन बैठकों में मार्गदर्शन करेंगे।
सख्त रुख अपनाने की तैयारी
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि सत्ता में होने के बावजूद पार्टी के जनप्रतिनिधियों का इस तरह सत्र से दूरी बनाना नेतृत्व को नागवार गुजर रहा है। यही वजह है कि प्रदेश नेतृत्व अब सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि अगर इस मुद्दे पर कड़ा अनुशासन लागू किया गया, तो भाजपा के भीतर छिपा असंतोष और गुटबाजी भी खुलकर सामने आ सकती है।

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