-राणाप्रताप कॉलेज में महिला शिक्षिकाओं की भूमिका पर चर्चा
सामना संवाददाता / सुल्तानपुर
राणाप्रताप पीजी कालेज के बीएड विभाग ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के परिप्रेक्ष्य में नई शिक्षानीति के संदर्भ में ‘महिला शिक्षिकाओं की भूमिका और चुनौतियां विषयक संगोष्ठी आयोजित की। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी को असिस्टेंट प्रोफेसर शांतिलता कुमारी ने कहा कि महिलाएँ यदि अपनी नारी-सुलभ भूमिकाओं के निर्वहन में गौरव का अनुभव करें, तभी वे समाज को सही दिशा दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल संरक्षित रहने की मानसिकता से बाहर निकलकर सशक्त बनते हुए संरक्षण देने वाली शक्ति के रूप में आगे आना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. सीमा सिंह ने कहा कि महिलाओं को अपने कर्मक्षेत्र के अनुरूप मूल्य आधारित भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करता है तो अधिकार स्वतः प्राप्त हो जाते हैं, इसलिए कर्तव्यनिष्ठा ही सफलता की कुंजी है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. संतोष सिंह अंश ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस २०२६ की थीम “अधिकार, न्याय और कार्रवाई – सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए” है। उन्होंने कहा कि समाज में वास्तविक समानता तभी संभव है जब महिलाओं को शिक्षा, अवसर और निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में समान भागीदारी मिले। उन्होंने गिव टू गेन के सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए कहा कि समाज और शिक्षा के क्षेत्र में जितना अधिक हम योगदान देंगे, उतना ही अधिक सकारात्मक परिवर्तन हमें देखने को मिलेगा। संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। प्रिया ने कहा कि शिक्षा ही महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वावलंबन का सबसे सशक्त माध्यम है। अभिषेक कुमार ने कहा कि “महिला शिक्षिकाएँ नई पीढ़ी को संवेदनशील और संस्कारित नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।आदर्श दीक्षित ने कहा कि नई शिक्षानीति महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलती है। वर्षा यादव ने कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए महिला शिक्षा और सशक्तिकरण अनिवार्य है। कार्यक्रम का संचालन वर्षा यादव ने किया।
