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खाड़ी देशों के युद्ध का असर छोटे कस्बों तक पहुंचा…गैस सिलिंडर ही नहीं है … बिटिया का ब्याह कैसे होगा?.. ऑन कैमरा छलका बेबस बाप का दर्द

खाड़ी देशों में चल रहे संघर्ष की लपटें अब छोटे‑छोटे कस्बों तक पहुंच चुकी हैं। स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में मुश्किलें बढ़ गई हैं। इसी कड़ी में एक बेबस बाप का दर्द ऑन वैâमरा छलक आया। उसने बताया कि उसकी बिटिया की शादी केवल २ दिन बाद है, लेकिन युद्ध और हालात की वजह से शादी के आयोजन को लेकर अनिश्चितता छाई हुई है। बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले में इन दिनों एलपीजी गैस सिलिंडर को लेकर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि सुबह होते ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं और लोग घंटों अपनी बारी का इंतजार करते नजर आते हैं। इस तरह जिले के कस्बों और ग्रामीण इलाकों में सिलिंडरों की कमी ने आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। खासतौर पर जिन घरों में शादी-विवाह जैसे कार्यक्रम होने वाले हैं, वहां यह समस्या और भी गंभीर बन गई है।
बता दें कि चित्रकूट जिले के मानिकपुर में रहनेवाले राम बदन सेन के घर १३ मार्च को उनकी बेटी की शादी होनी है। शादी की तैयारियों के बीच गैस सिलिंडर की कमी ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। राम बदन सेन ने अपना दर्द बताते हुए कहा कि पिछले एक हफ्ते से वह लगातार गैस एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं। बड़ी मुश्किल से उन्हें दो से तीन सिलिंडर मिल पाए हैं, जबकि शादी में आने वाले मेहमानों और बारातियों के लिए भोजन बनाने के लिए और सिलिंडर की जरूरत है।
३ मार्च को बुक किया सिलिंडर, अभी तक नहीं मिला
गैस एजेंसी के बाहर सिलिंडर लेने के लिए लाइन में खड़ी सकरौहा गांव की निवासी राजकुमारी ने भी अपनी परेशानी साझा की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने ३ तारीख को अपना एलपीजी गैस सिलिंडर बुक किया था। इसके बाद जब वह एजेंसी पहुंचीं तो उन्हें बताया गया कि अभी सिलिंडर उपलब्ध नहीं है और बाद में आने को कहा गया।

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