मुख्यपृष्ठस्तंभस्कैम्स एंड स्कैंडल्स : जब लंदन की सड़क पर उतरी राजकुमारी!

स्कैम्स एंड स्कैंडल्स : जब लंदन की सड़क पर उतरी राजकुमारी!

(एक परी कथा का अंत–६)

श्रीकिशोर शाही

२९ जुलाई १९८१ की सुबह लंदन की सड़कों पर असाधारण भीड़ थी। लोग उस राजकुमारी की एक झलक पाने को बेताब थे, जो कुछ ही देर बाद प्रिंस चार्ल्स की दुल्हन बननेवाली थी। सेंट पॉल वैâथेड्रल की ओर बढ़ती बग्घी के दोनों ओर हजारों लोग खड़े थे। भीतर बैठी थीं लेडी डायना स्पेंसर, जो कुछ ही मिनटों में ब्रिटेन के युवराज प्रिंस चार्ल्स की पत्नी बनने वाली थीं। शाही परंपरा, औपचारिकता और उत्सव का यह दृश्य पूरी दुनिया देख रही थी। उस दिन लाइव प्रसारण की दुनिया में एक रिकॉर्ड बना था। उस लाइव टेलीविजन प्रसारण को ७० करोड़ से अधिक लोगों ने देखा था।
वैâथेड्रल के भीतर समारोह औपचारिक और भव्य था। राजघराने के सदस्य, विदेशी अतिथि और चर्च के अधिकारी उपस्थित थे। डायना का लंबा सफेद गाउन और उनका संयमित व्यवहार तुरंत चर्चा का विषय बन गया। कुछ ही क्षणों में विवाह की शपथ ली गई और लेडी डायना स्पेंसर आधिकारिक रूप से प्रिंसेस ऑफ वेल्स बन गर्इं। उस क्षण को ब्रिटिश राजशाही के लिए नई शुरुआत के रूप में देखा गया। विवाह के बाद जुलूस बकिंघम पैलेस की ओर बढ़ा। रास्ते में भीड़ हाथ हिलाकर स्वागत कर रही थी। महल की बालकनी पर नवविवाहित जोड़े का सार्वजनिक अभिवादन हुआ, जो उस दिन की सबसे प्रतीकात्मक तस्वीर बन गई। बाहर से यह दृश्य किसी परीकथा की परिणति जैसा था। एक युवा राजकुमारी और भविष्य के राजा का मिलन, लेकिन इस चमक के पीछे जिम्मेदारियों का एक विशाल ढांचा भी था। डायना अब केवल परिवार की सदस्य नहीं थीं, वे राजपरिवार का चेहरा बन चुकी थीं। हर सार्वजनिक कार्यक्रम, हर यात्रा और हर वक्तव्य अब राजपरिवार की छवि से जुड़ा था।
शादी ने डायना को दुनिया की सबसे पहचानी जाने वाली महिलाओं में बदल दिया। वैâमरे उनकी हर गतिविधि दर्ज करने लगे। महल की दीवारों के भीतर उनका नया जीवन शुरू हुआ, जहां परंपरा, प्रोटोकॉल और निजी भावनाओं के बीच संतुलन साधना आसान नहीं था। उस दिन लंदन ने उत्सव देखा था, लेकिन कहानी वहीं समाप्त नहीं हुई। समय के साथ वही विवाह, जिसे परीकथा कहा गया, अपने भीतर की जटिलताओं के साथ सामने आने वाला था।
(शेष अगले अंक में)

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