सामना संवाददाता / मुंबई
अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। इससे हिंदुस्थान के निर्यात पर ग्रहण लग गया है। इसका परिणाम है कि अभी तक देश को ५० बिलियन डॉलर का फटका लग चुका है। दूसरी तरफ खाड़ी देशों के विभिन्न बंदरगाहों पर हिंदुस्थान के करीब साढ़े तीन लाख कंटेनर अटके हुए हैं। ऐसे में हिंदुस्थान के निर्यात को खासा झटका लगा है।
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के गंभीर असर हिंदुस्थानी व्यापार पर दिखने लगे हैं। इस संघर्ष के कारण गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल देशों को होने वाले निर्यात पर खतरा मंडरा रहा है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस युद्ध की वजह से पेट्रोलियम उत्पाद, कीमती धातु, रत्न और आभूषण जैसे प्रमुख क्षेत्रों को बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा अनाज, प्रोसेस्ड फूड, कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स के निर्यात पर भी विपरीत असर पड़ने की आशंका है।
समुद्र में खड़े हैं जहाज
अमेरिका-ईरान के युद्ध ने खाड़ी देशों के व्यापार को पूरी तरह से ठप कर दिया है। बीच समुद्र में विभिन्न देशों के हजारों जहाज फंसे हुए हैं। उन्हें इंतजार है कि कब उन्हें अनुमति मिले और वे आगे बढ़ें। ऐसे में हिंदुस्थान का व्यापार भी ठप पड़ गया है।
इस संबंध में सरकारी सूत्रों के अनुसार निर्यात पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन सामान की डिलिवरी में देरी हो रही है। जहाजों के लिए वैकल्पिक समुद्री मार्गों का इस्तेमाल किया जा रहा है। खाड़ी देश फिलहाल दबाव में जरूर हैं, लेकिन वे हिंदुस्थान के साथ व्यापारिक मार्ग खुले रखने के इच्छुक हैं। इस बीच अरब सागर और ओमान के समुद्री क्षेत्र में फंसे कुछ हिंदुस्थानी जहाज आगे बढ़ने की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। बहरहाल, स्थिति और चिंताजनक इसलिए हो गई है क्योंकि ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर कालीबाफ ने मंगलवार को युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। दूसरी ओर संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि इस युद्ध में उसे ‘अनावश्यक रूप से’ निशाना बनाया जा रहा है।
