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राज्य की अर्थव्यवस्था खा रही हिचकोले…महाराष्ट्र का हर एक नागरिक ८५ हजार रुपए के कर्ज में!.. बजट कटौती से चल रहा है काम… कुल ऋण ११ लाख करोड़ रुपए के पार… ‘लाडली बहन’ के चलते खजाना खाली

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

आर्थिक कुप्रबंधन के आरोपों से घिरी महायुति सरकार के कार्यकाल में महाराष्ट्र की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य का कुल कर्ज ११ लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है और अब हर एक नागरिक पर औसतन ८५ हजार रुपए का कर्ज लद चुका है। दूसरी ओर शिक्षा, सामाजिक न्याय और आदिवासी विकास जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक क्षेत्रों के बजट में कटौती की गई है, जबकि ‘लाडली बहन’ योजना पर अनुमानित राशि से ७०५ प्रतिशत अधिक खर्च किया गया है। इससे सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं और बजट प्रबंधन पर तीखी बहस छिड़ गई है।
महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति को लेकर महायुति सरकार एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर आ गई है। राज्य का कुल कर्ज लगातार बढ़ते-बढ़ते अब ११ लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है और इसका सीधा बोझ आम जनता पर पड़ रहा है। बढ़ते कर्ज और सामाजिक क्षेत्रों के घटते खर्च को लेकर सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष २०१८-१९ में राज्य का कर्ज ४.०७ लाख करोड़ रुपए था, जो कुछ ही वर्षों में बढ़कर २०२५-२६ में ११.०२ लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
बुनियादी क्षेत्रों की अनदेखी
बजट के आंकड़े बताते हैं कि सरकार ने सामाजिक क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण विभागों के खर्च में कटौती की है। स्कूली शिक्षा, सामाजिक न्याय और आदिवासी विकास जैसे विभागों के बजट में मिलाकर करीब ९,८७१ करोड़ रुपए की कमी दर्ज की गई है। यह कमी लगभग ८ प्रतिशत के आसपास है। इन विभागों में कटौती को लेकर विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने बुनियादी सामाजिक क्षेत्रों की अनदेखी की है।
राज्य पर कर्ज (रुपए में)
 कुल लोन ११,०२,६५४ करोड़
 प्रति नागरिक कर्ज – ८५,२७८
 सामाजिक विभागों के फंड में ९,८७१ करोड़ कटौती
 ‘लाडली बहन’ योजना पर खर्च – ७०५ज्ञ् अधिक

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