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गया व्यवहार न्यायालय में पटना उच्च न्यायालय का बेंच जल्द स्थापित किया जाए – कांग्रेस

अनिल मिश्र / पटना

बिहार से झारखंड राज्य के विभाजन से पूर्व जिस प्रकार रांची में पटना उच्च न्यायालय का बेंच स्थापित था, उसी तर्ज पर अब झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद मध्य-दक्षिण बिहार के गया व्यवहार न्यायालय में पटना उच्च न्यायालय का बेंच स्थापित करने की 25 वर्षों पुरानी मांग को अविलंब पूरा करने की मांग कांग्रेस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार से की है।

इस संबंध में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता विजय कुमार मिठ्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष बाबूलाल प्रसाद सिंह, राम प्रमोद सिंह, दामोदर गोस्वामी, विपिन बिहारी सिन्हा, शिव कुमार चौरसिया, अनिल बेलदार और सुजीत गुप्ता सहित अन्य नेताओं ने कहा कि मध्य-दक्षिण बिहार के लोग झारखंड के गठन के बाद से लगातार केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ पटना उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय, दिल्ली के मुख्य न्यायाधीशों से इस संबंध में मांग करते आ रहे हैं।

नेताओं ने कहा कि हाल ही में मुख्य न्यायाधीश के गया दौरे और व्यवहार न्यायालय आगमन के दौरान भी गया में उच्च न्यायालय का बेंच स्थापित करने की चर्चा हुई थी। इससे क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी है कि उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग जल्द पूरी हो सकती है।

उन्होंने कहा कि यदि गया व्यवहार न्यायालय में पटना उच्च न्यायालय का बेंच स्थापित हो जाता है, तो गया सहित मध्य-दक्षिण बिहार के लगभग एक दर्जन जिलों के लोगों को न्यायिक कार्यों में काफी सहूलियत मिलेगी। वर्तमान में इन जिलों के लोगों को अपने मामलों की सुनवाई के लिए पटना तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों की अधिक खर्च होती है।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि गया व्यवहार न्यायालय में उच्च न्यायालय का बेंच स्थापित करने के साथ-साथ न्यायालय के नए भवन का निर्माण भी आवश्यक है। इसमें अधिवक्ताओं के बैठने की समुचित व्यवस्था और आम लोगों के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि मध्य-दक्षिण बिहार की जनता की इस लंबे समय से चली आ रही मांग को गंभीरता से लेते हुए गया में पटना उच्च न्यायालय का बेंच जल्द से जल्द स्थापित किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को न्यायिक प्रक्रिया में आसानी मिल सके।

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