मुख्यपृष्ठखेलआउट ऑफ पवेलियन : पंड्या पर हो गई एफआईआर!

आउट ऑफ पवेलियन : पंड्या पर हो गई एफआईआर!

अमिताभ श्रीवास्तव

हार्दिक पंड्या की हरकतों से भारतभर में मिश्रित प्रतिक्रियाएं व्यक्त की जा रही थीं। अब एक ऐसा मामला गहरा गया है, जिससे वो मुसीबत में आ सकते हैं। माना कि हार्दिक को अपनी गर्लप्रâेंड महिका शर्मा के साथ बेइंतेहा मुहब्बत है और वे सार्वजनिक रूप से इसे जाहिर भी करते हैं किंतु अति हर चीज की ठीक नहीं होती। कहने वाले कहते हैं कि वे जबसे नताशा से अलग हुए हैं और अपनी नई प्रेमिका के साथ हैं तबसे सार्वजनिक रूप से उनका व्यवहार बदला हुआ है। नताशा को जतलाने वाला रहा है कि वो अलग होकर कोई गम में नहीं हैं। जो हो मगर इन सबके बीच वर्ल्ड कप जीत के जश्न के बाद एक नए विवाद में घिर गए हैं। पुणे के एक वकील ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी और एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। पुणे के वकील वाजिद खान ने पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि अमदाबाद में भारत की टी२० वर्ल्ड कप जीत के बाद मैदान पर जश्न के दौरान पंड्या ने तिरंगे को अपने शरीर पर लपेट लिया और कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार किया। शिकायत में कहा गया है कि यह कृत्य राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा के खिलाफ है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। यह शिकायत पुणे के शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में दी गई है। तिरंगा लपेट कर वे महिका के साथ नाच गा रहे थे। यहां तक कि एक-दूसरे के साथ गले लिपटना, चुंबन देना और पोडियम पर लेट भी गए थे। इसे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान माना जा रहा है और अब तो इस पर एफआईआर भी हो गई है ।
सुनो, धोनी विलेन नहीं है!
सब जानते हैं कि भारतीय क्रिकेट जगत में धोनी बनाम योगराज सिंह का विवाद बहुत गहराया है। एक बार फिर यह विवाद चर्चा के केंद्र में है। पिछले कई सालों से युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह लगातार यह दावा करते रहे हैं कि पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने जानबूझकर उनके बेटे का करियर खत्म किया। योगराज का गुस्सा जगजाहिर है और वे सार्वजनिक मंचों पर कई बार कह चुके हैं कि वे धोनी को कभी माफ नहीं करेंगे। लेकिन अब भारत के पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटील ने इस पूरी कहानी को एक नया और चौंकाने वाला मोड़ दे दिया है। एक हालिया बातचीत में संदीप पाटील ने उस कमरे के भीतर की हकीकत बयां की जहां टीम इंडिया का भविष्य तय होता है। पाटील ने बेहद साफ शब्दों में और रिकॉर्ड पर यह बात कही कि चयन समिति की बैठकों के दौरान धोनी ने कभी भी युवराज सिंह को टीम से बाहर करने की सिफारिश नहीं की। अक्सर कप्तानों पर अपनी पसंद के खिलाड़ी चुनने का दबाव बनाने के आरोप लगते हैं, लेकिन पाटील के अनुसार, धोनी इसके विपरीत थे। उन्होंने बताया कि धोनी ने हमेशा चयनकर्ताओं के पैâसलों का सम्मान किया और कभी भी किसी खिलाड़ी के करियर में ‘बाधा’ बनने की कोशिश नहीं की। संदीप पाटील ने जहां धोनी का बचाव किया, वहीं उन्होंने योगराज सिंह के प्रति भी सहानुभूति दिखाई। उनका मानना है कि एक पिता का अपने बेटे के लिए भावुक होना और उसके करियर के प्रति सुरक्षात्मक महसूस करना स्वाभाविक है। हालांकि, भावनाओं से परे हटकर पाटील ने स्पष्ट किया कि युवराज को टीम से बाहर रखने का पैâसला पूरी तरह से चयन समिति का था, न कि कप्तान का व्यक्तिगत निर्णय। पाटिल का यह बयान योगराज सिंह के उन दावों को सीधे तौर पर चुनौती देता है जिसमें धोनी को ‘विलेन’ की तरह पेश किया जाता रहा है।

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