धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
युद्ध के असर और गैस किल्लत की आशंका ने महाराष्ट्र में बेचैनी को चरम पर पहुंचा दिया है। राज्य के कई जिलों और शहरों में सिलेंडर के लिए मानो जंग छिड़ गई है। नागपुर, मालेगांव और सातारा समेत कई जगह गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ रही है और घबराहट में लोग सिलेंडर लेने के लिए मारामारी पर उतारू हो रहे हैं। हालात संभालने के लिए कई स्थानों पर गैस एजेंसियों के बाहर पुलिस बंदोबस्त में वितरण कराना पड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गैस संकट की आहट के बीच विधानमंडल की कैंटीन में भी फिलहाल केवल चाय और छाछ ही परोसी जा रही है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब महाराष्ट्र में साफ दिखने लगा है। राज्य के कई जिलों में गैस सिलेंडर को लेकर अफरा-तफरी मची हुई है। नागपुर, मालेगांव, सातारा और कोल्हापुर जैसे शहरों में लोग सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े हैं। मालेगांव में लगातार दूसरे दिन गैस के लिए भारी भीड़ उमड़ी। सुबह होते ही वितरण केंद्रों पर लंबी लाइनें लग गईं और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई। प्रशासन का दावा है कि हर उपभोक्ता को गैस मिलेगी, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। नागपुर में भी तेज धूप के बावजूद लोग घंटों तक गोदामों के बाहर खड़े दिखाई दिए। हाल ही में सिलेंडर से भरा ट्रक पहुंचने के बाद वितरण शुरू हुआ। लेकिन संभावित किल्लत के डर से लोग बड़ी संख्या में एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं। एजेंसी संचालकों का कहना है कि असली कमी नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था की तकनीकी दिक्कतों से यह स्थिति बनी है।
विपक्ष का आरोप तेज
इस घटनाक्रम ने राज्य में गैस आपूर्ति को लेकर उठ रहे सवालों को और तेज कर दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब सत्ता के केंद्र माने जाने वाले विधानमंडल की कैंटीन में ही गैस की कमी महसूस होने लगी है, तो आम जनता की परेशानी का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। वहीं सरकार का कहना है कि राज्य में गैस की वास्तविक कमी नहीं है और यह केवल एहतियातन लिया गया निर्णय है।
अफवाहों से उमड़ रही भीड़
सातारा के बॉम्बे रेस्टोरेंट चौक स्थित इंडेन एजेंसी के बाहर भी सुबह से भारी भीड़ उमड़ी। प्रशासन का कहना है कि जिले में १०-१२ दिन का गैस स्टॉक मौजूद है और रोजाना करीब २२ हजार सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं, फिर भी लोग अफवाहों से घबराकर एजेंसियों पर उमड़ रहे हैं।
चावल निर्यात लगभग ठप
इस संकट का असर उद्योगों पर भी दिखने लगा है। भंडारा जिले में खाड़ी देशों को होने वाला चावल निर्यात लगभग ठप हो गया है, जिससे कई राइस मिलों ने उत्पादन घटा दिया है और कामगारों की छंटनी शुरू हो गई है।
कैंटीन में बड़ी मात्रा में होता है गैस का इस्तेमाल
सूत्रों के अनुसार, वैंâटीन में रोजाना बड़ी मात्रा में एलपीजी का इस्तेमाल होता है। लेकिन हाल के दिनों में गैस की आपूर्ति को लेकर बने दबाव और संभावित किल्लत को देखते हुए खाना बनाने का काम सीमित कर दिया गया है। इसी वजह से कैंटीन में बनने वाले अधिकांश व्यंजन बंद कर दिए गए हैं और कर्मचारियों के लिए फिलहाल केवल चाय और छाछ की व्यवस्था की गई है।
अवैध सिलेंडर कारोबार पर छापे
गैस संकट के बीच प्रशासन ने अवैध इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पंढरपुर के सांगोला नाका इलाके में घरेलू सिलेंडर से रिक्शा में गैस भरकर बेचने के मामले में आरोपी के खिलाफ पहला केस दर्ज किया गया और १३ सिलेंडर जब्त किए गए। वहीं गोंदिया और तिरोड़ा के दो होटलों पर छापे में ७ घरेलू सिलेंडर पकड़े गए, जिनका इस्तेमाल व्यावसायिक काम में किया जा रहा था।
विधानमंडल की कैंटीन से मेन्यू गायब
महाराष्ट्र में गैस किल्लत की आशंका के बीच इसका असर अब सीधे विधानमंडल तक पहुंच गया है। मुंबई में चल रहे विधानमंडल सत्र के दौरान कैंटीन में भोजन सेवा लगभग ठप हो गई है। फिलहाल, कल यहां आनेवाले लोगों को केवल चाय और छाछ ही उपलब्ध कराई जा रही है। गैस आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और सीमित स्टॉक के कारण कैंटीन प्रबंधन ने यह अस्थायी फैसला लिया है।
