सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक नरेंद्र मेहता ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बुधवार को विधानसभा में बजट अधिवेशन के दौरान एमएमआरडीए के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। नरेंद्र मेहता ने मेट्रो ठेकेदार जे. कुमार के खिलाफ एमएमआरडीए अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके राज्य सरकार को लूटने, जमीन का अधिक किराया वसूलने और काम के मुकाबले ज्यादा धनराशि वसूलने सहित कई गंभीर मुद्दों का पर्दाफाश किया। मेहता के अनुसार, मीरा-भायंदर इलाके के चेना गांव में स्थित कास्टिंग यार्ड ऐसी जमीन पर स्थापित किया गया है जो न सिर्फ पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र है बल्कि आदिवासी आरक्षित भूमि का हिस्सा है। बाजार मूल्य लगभग २० करोड़ रुपये होने के बावजूद ठेकेदार ने एमएमआरडीए से इस जमीन के लिए ८० करोड़ रुपये किराये के रूप में वसूला है। इसके अलावा, मेहता द्वारा यह भी दावा किया गया है कि दहिसर मेट्रो स्टेशन के निर्माण कार्य के लिए मूल निविदा ६० करोड़ रुपये की थी, जिसे ठेकेदार को कथित रूप से लाभ पहुंचाने हेतु मनमाने तरीके से बढ़ाकर १२० करोड़ रुपये कर दिया गया। परियोजना में देरी के लिए ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराते हुए मेहता ने आरोप लगाया कि दहिसर-मीरा-भायंदर मेट्रो रेल का काम २०२३ तक पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन २०२६ के बाद भी काम अधूरा होने के बावजूद ठेकेदार पर कोई जुर्माना न लगाया जाना संदेहजनक है। इसके अलावा, मेट्रो लाइन के नीचे समानांतर फ्लाईओवर का काम निविदा से अधिक दर पर दिया जाना और गायमुख में एक पुल का काम बिना निविदा प्रक्रिया के सीधे ठेकेदार को सौंपे जाने जैसी गंभीर और गैर कानूनी कृत्य भी सामने आए हैं।
सेल्फ गोल या शिंदे को
घेरने का मेगा प्लान ?
ज्ञात हो कि शहरी विकास मंत्री होने के नाते उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एमएमआरडीए के अध्यक्ष ह। उल्लेखनीय है कि नरेंद्र मेहता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस के करीबी माने जाते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मेहता द्वारा इस तरह से सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना या तो सेल्फ गोल का एक उत्तम नमूना है या फिर शिंदे को घेरने की एक सोची समझी चाल।
