मुख्यपृष्ठनए समाचारसुप्रीम कोर्ट ने बोला, मामला बहुत लंबित हो चुका है!... शिवसेना किसकी?...

सुप्रीम कोर्ट ने बोला, मामला बहुत लंबित हो चुका है!… शिवसेना किसकी? …अगले महीने लगातार होगी सुनवाई

सबसे पहले ‘गद्दारों’ की
पात्रता पर फैसला
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
तीन वर्षों से लंबित शिवसेना पक्ष और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न से जुड़े मामले में आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में लगातार सुनवाई करने की तैयारी दिखाई है। शिवसेना की याचिका पर ‘अगली तारीख’ तय करने को लेकर गुरुवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष करीब चार मिनट तक सुनवाई हुई। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने लगातार सुनवाई के लिए तारीख तय करने का अनुरोध किया। प्रधान न्यायाधीश ने उनकी मांग स्वीकार करते हुए टिप्पणी की कि यह मामला बहुत दिनों से लंबित है और लगातार कई दिनों तक रोज दोपहर २ बजे सुनवाई करने की सहमति जताई। अदालत सबसे पहले ‘गद्दार’ विधायकों की पात्रता पर पैâसला करेगी। अदालत की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामले की अगली सुनवाई १ अप्रैल को होगी।

चुनाव आयोग के फैसले को दी है चुनौती
उद्धव ठाकरे ने दायर की है सुप्रीम कोर्ट में याचिका

शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्रीय चुनाव आयोग के पैâसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। यह याचिका पिछले तीन वर्षों से लंबित है। मूल शिवसेना से अलग हुए शिंदे गुट को पार्टी का नाम और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न देने के चुनाव आयोग के पैâसले को इस याचिका में चुनौती दी गई है। गुरुवार को इस याचिका पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। इस दौरान उद्धव ठाकरे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा।
सिब्बल ने अदालत को बताया कि शिंदे गुट ने मूल शिवसेना पक्ष पर अवैध कब्जा कर लिया है। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने शिंदे गुट के ‘बागी’ विधायकों की अयोग्यता के मुद्दे पर पहले सुनवाई करने का अनुरोध किया। सुप्रीम कोर्ट में पार्टी और चुनाव चिह्न के मामले के साथ-साथ शिंदे गुट के विधायकों को अयोग्य ठहराने से जुड़ी एक अलग याचिका भी लंबित है। सिब्बल ने तर्क दिया कि अदालत को पहले बागी विधायकों की अयोग्यता पर पैâसला करना चाहिए और शिवसेना पक्ष व ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न असली शिवसेना का ही है। उनके अनुरोध को ध्यान में रखते हुए प्रधान न्यायाधीश की खंडपीठ ने लगातार कई दिनों तक रोज दोपहर २ बजे सुनवाई करने की तैयारी जताई। हालांकि, सुनवाई के समय अगली तारीख घोषित नहीं की गई थी। लेकिन बाद में अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर १ अप्रैल को अगली सुनवाई तय होने की जानकारी दी गई। अदालत में शिवसेना की ओर से बहस के दौरान कपिल सिब्बल की सहायता अधिवक्ता असीम सरोदे, निशांत पाटील, रवि अडसुरे और रोहित शर्मा ने की।
‘गद्दारों’ की बढ़ी चिंता!
सुनवाई की शुरुआत में ही वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ‘बागी’ विधायकों की अयोग्यता का मुद्दा उठाया। शिंदे गुट के विधायकों को अयोग्य ठहराने के बजाय योग्य ठहराने वाले विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के पैâसले को शिवसेना के मुख्य सचेतक और विधायक सुनील प्रभु ने एक अलग याचिका के माध्यम से चुनौती दी है। जैसे ही सिब्बल ने अयोग्यता के मुद्दे पर पैâसला करने की मांग की वैसे ही शिंदे गुट में चिंता बढ़ गई। शिंदे गुट के वकीलों ने यह कहते हुए सुनवाई का विरोध किया कि उस समय की विधानसभा की अवधि समाप्त हो चुकी है।

अन्य समाचार