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विधान परिषद में जलवायु परिवर्तन पर चिंता …पारा चढ़ा तो डूबेगी मुंबई! …महाराष्ट्र के तटीय इलाकों पर भी संकट

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महाराष्ट्र में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे को लेकर विधान परिषद में आधा घंटे की चर्चा के दौरान गंभीर चिंता जताई गई। शिवसेना सदस्य सुनील शिंदे ने कहा कि यदि तापमान में बढ़ोतरी का यही सिलसिला जारी रहा तो मुंबई के डूबने का खतरा पैदा हो सकता है और राज्य के तटीय इलाकों पर भी बड़ा संकट मंडरा सकता है। उन्होंने आईपीसीसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार से मांग की कि इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ठोस और समयबद्ध योजना लागू की जाए। साथ ही महायुति सरकार से तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर निधि उपलब्ध कराने की भी मांग की।

`चार आर’ के सिद्धांतों पर कदम उठाने की जरूरत
शिवसेना सदस्य ने की ठोस योजना लागू करने की मांग

महाराष्ट्र में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे को लेकर विधान परिषद में गंभीर चिंता व्यक्त की गई। सदन में शिवसेना विधायक सुनील शिंदे ने कहा कि शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे जब मुख्यमंत्री थे, तब अंतर्राष्ट्रीय संस्था इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज की जलवायु परिवर्तन संबंधी रिपोर्ट को गंभीरता से लिया गया था। उस समय पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में महाराष्ट्र में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई थी। इसी पहल के तहत मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में राज्य जलवायु परिवर्तन परिषद की स्थापना भी की गई थी।
सदन में इस पर जवाब देते हुए पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित चार ‘आर’ यानी रिड्यूस, रियूज, रीसायकल और रिकवर के सिद्धांतों के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण के लिए राज्यों को प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में आता है और यदि तापमान में ०.१ से २.५ डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होती है तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इससे राज्य के समुद्री तटीय क्षेत्रों के डूबने का खतरा बढ़ सकता है। मध्य महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति बन सकती है और जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। पंकजा मुंडे ने कहा कि आईपीसीसी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के १२ शहरों में समुद्री तट के डूबने का खतरा बढ़ रहा है। इसके अलावा अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव जैसे पर्यावरणीय संकट भी सामने आ सकते हैं।
तैयार होगी कार्य योजना
पंकजा मुंडे ने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार से मांग की गई कि मुंबई जैसे समुद्र तटीय शहरों को जलवायु परिवर्तन के खतरे से बचाने के लिए आवश्यक उपायों को लेकर पर्याप्त वित्तीय प्रावधान किया जाए। साथ ही यह भी कि राज्य सरकार जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए समयबद्ध कार्य योजना और राज्य स्तरीय विस्तृत एक्शन प्लान तैयार करेगी।

तैयार करनी होगी प्रभावी पर्यावरणीय नीति
सदन में मंत्री ने यह भी कहा कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए २०३० तक कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण में कमी लाने के लिए ठोस रणनीति तैयार की जानी चाहिए। इसके लिए सरकार, वैज्ञानिकों, उद्योगों और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से प्रभावी योजनाएं बनाना आवश्यक बताया गया। उन्होंने कहा कि आनेवाली पीढ़ियों को सुरक्षित पर्यावरण देने के लिए राज्य को दीर्घकालीन और प्रभावी पर्यावरणीय नीति तैयार करनी होगी।

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