उत्खनन-समतलीकरण काम में कंपनी ने नहीं भरे पैसे अनिल परब की एसआईटी जांच की मांग
सामना संवाददाता / मुंबई
नई मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण कार्य में जमीन के उत्खनन और समतलीकरण के दौरान करीब ४९६ करोड़ रुपए की आर्थिक अनियमितता का मामला सामने आया है। शिवसेना विधायक एड. अनिल परब ने विधान परिषद में दस्तावेजों के आधार पर गंभीर आरोप लगाया कि ठेका पानेवाली कंपनी ने उत्खनन किए गए बड़े हिस्से का भुगतान सरकार को नहीं किया, जिससे सरकारी तिजोरी को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के आशीर्वाद वाली भारती इंप्रâा कंपनी ने राज्य सरकार को यह नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने नगर विकास विभाग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की एसआईटी से जांच कराने की मांग की। विपक्ष के इन आरोपों के बाद सदन में इस मुद्दे को लेकर तीखी चर्चा भी हुई।
विधान परिषद में विपक्ष की ओर से नियम २६० के तहत हुई चर्चा के दौरान एड. अनिल परब ने नगर विकास विभाग के अंतर्गत आनेवाली म्हाडा, सिडको, मनपा, एमएमआरडीए और नगर पालिकाओं में हो रहे कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि मुंबई एयरपोर्ट परियोजना में भारती इंप्रâा प्रोजेक्ट को जमीन उत्खनन और समतलीकरण का काम दिया गया था। कंपनी को १ करोड़ ५ लाख ६१ हजार २९१ ब्रास मिट्टी का उत्खनन करना था। लेकिन उसमें से ८२ लाख ब्रास के लिए सरकार को भुगतान नहीं किया गया। एक ब्रास के ६०० रुपए के हिसाब से कंपनी ने सरकार के लगभग ४९६ करोड़ रुपए बकाया रखे हैं।
बिना अनुमति बड़े पैमाने पर पहाड़ों की खुदाई
अनिल परब ने कहा कि उत्खनन कार्य में बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया गया। वुâंडे वहाल क्षेत्र में चल रही ८० क्वारियों में से केवल दो को अनुमति थी। वहीं खारघर-पनवेल की सभी १० क्वारियां अवैध पाई गईं। टेंभुर्ले-पनवेल में भी १०, वलवली-पनवेल में ५ तथा अन्य कई स्थानों पर अवैध उत्खनन हो रहा है।
मुख्यमंत्री की रोक के बावजूद तबादलों को मंजूरी
परब ने यह भी आरोप लगाया कि मुंबई मनपा में १३० अधिकारियों के तबादलों में अनियमितता सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने विधान परिषद में इन तबादलों पर रोक लगाने की घोषणा की थी। इसके बावजूद नवनियुक्त महापौर रितु तावडे ने इस रोक को हटा दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले अधिकारी सरकार की नहीं सुनते थे, अब क्या महापौर भी मुख्यमंत्री के आदेशों को नजरअंदाज कर रही हैं?
