सूरज सिंह
हिंदुस्थान के कुख्यात माफिया सरगना रवि पुजारी के प्रत्यर्पण को लेकर बंगलुरु, गुजरात, मुंबई और ठाणे की पुलिस लंबे समय तक इंतजार करती रही थी। पश्चिम अप्रâीका के देश सेनेगल की राजधानी डकार में पुलिस ने उसे फर्जी पासपोर्ट के मामले में हिरासत में लिया था। उस समय वह एक होटल के पास हजामत बनवा रहा था, तभी पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। भारतीय एजेंसियां इस बात की जानकारी जुटाने में लगी रहीं कि रवि पुजारी के साथ गिरफ्तार किए गए अन्य तीन लोग कौन थे। गिरफ्तारी के तुरंत बाद बंगलुरु से एक अधिकारी की टीम सेनेगल पहुंच गई थी। इसके बाद दूसरी टीम भी रवाना हुई, जिसने सुल्या उर्फ रवि पुजारी के फिंगरप्रिंट लेकर उनका मिलान किया, जो सही पाया गया।
सेनेगल पुलिस ने यह भी जांच शुरू की कि सुल्या उर्फ रवि पुजारी कहीं श्रीलंका का नागरिक तो नहीं। डकार पुलिस ने उसे नकली पासपोर्ट पर यात्रा करने के आरोप में हिरासत में लिया था। हालांकि, उसके खिलाफ हिंदुस्थान में दर्ज धमकी, हत्या और हफ्तावसूली जैसे गंभीर मामलों को लेकर वहां कोई अलग आरोप नहीं लगाया गया था।
गिरफ्तारी के बाद रवि पुजारी ने अपने वकील के माध्यम से भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील भी की थी। उसके वकील अल हाड्जी डिओफ ने अदालत में जोरदार बहस की, लेकिन अदालत ने इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस को अधिक महत्व दिया।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सेनेगल की अदालत ने उसके खिलाफ वारंट जारी कर उसे सीधे रीबस जेल भेज दिया था। इसके बाद सेनेगल के अटॉर्नी जनरल ने भी उससे पूछताछ की। हिंदुस्थान के अधिकारियों ने अदालत में उसके प्रत्यर्पण के लिए आवेदन भी दिया था।
दिलचस्प बात यह रही कि सेनेगल के कई अखबारों में उसका नाम ‘सुल्या पुजारी’ लिखा जा रहा था, जिससे सुरक्षा एजेंसियां कुछ समय तक उलझन में रहीं। भारतीय अधिकारियों ने सेनेगल प्रशासन को दस्तावेज भेजकर यह साबित करने की कोशिश की कि सुल्या पुजारी ही हिंदुस्थान का वांछित अपराधी रवि पुजारी है और उसे हिंदुस्थान लाया जाना चाहिए।
रवि पुजारी के पुराने परिचितों के अनुसार, वह हिंदुस्थान लौटना नहीं चाहता था, क्योंकि उसे अपनी जान को खतरा होने का डर था। बताया जाता है कि उसके वकील पहले उसे डिप्टी प्रोसिक्यूटर के पास ले गए और बाद में डकार कोर्ट ऑफ अपील में अटॉर्नी जनरल के सामने पेश किया।
अटॉर्नी जनरल ने आदेश दिया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक आरोपी को हिरासत में रखा जाए। वहीं ठाणे पुलिस की एंटी एक्सटॉर्शन सेल के वरिष्ठ अधिकारी भी उसके भारत आने का इंतजार कर रहे थे ठाणे में दर्ज तीन मामलों में रवि पुजारी की तलाश की जा रही थी।
इन मामलों में एक बिल्डर पर फायरिंग, एक बुकी को जान से मारने की धमकी और राधेश्याम नामक अधिकारी को धमकी देने के आरोप शामिल थे। इन मामलों में उसके खिलाफ मकोका के तहत भी कार्रवाई की गई थी।
रवि पुजारी को हिंदुस्थान लाने की प्रक्रिया ने लोगों को उस समय की याद भी दिलाई, जब दाऊद गिरोह के माफिया सरगना आबू सालेम को पुर्तगाल से भारत लाने में इसी तरह की कानूनी जटिलताएं सामने आई थीं। आबू सालेम को २००२ में पुर्तगाल में गिरफ्तार किया गया था और लगभग तीन साल बाद २००५ में उसे भारत प्रत्यर्पित किया गया था।
