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निवेश गुरु : युद्ध, महंगाई और निवेश… क्या संकट ही अवसर बन सकता है?

भरतकुमार सोलंकी
मुंबई

दुनिया के इतिहास में हर बड़े युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव का पहला असर अक्सर ऊर्जा बाजार पर दिखाई देता है। जैसे ही युद्ध की स्थिति बनती है, कच्चे तेल यानी क्रूड आयल के दाम बढ़ने लगते हैं। तेल महंगा होता है तो उसका सीधा असर परिवहन, उद्योग और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत पर पड़ता है। परिणामस्वरूप महंगाई बढ़ती है और आयात पर निर्भर देशों की मुद्रा पर दबाव आता है। भारत जैसे देश में, जहां ऊर्जा की बड़ी मात्रा आयात की जाती है, ऐसे समय में भारतीय रुपया भी दबाव में आ सकता है। रुपया कमजोर होता है, महंगाई का दबाव बढ़ता है और स्वाभाविक रूप से बाजार का मनोबल यानी निवेशकों का भरोसा डगमगाने लगता है।
लेकिन क्या हर संकट केवल नुकसान ही लेकर आता है? निवेश के दृष्टिकोण से देखा जाए तो इतिहास यह भी बताता है कि ऐसे अस्थिर समय में अक्सर क्वालिटी कंपनियों के शेयर भी घबराहट में सस्ते हो जाते हैं। जब बाजार में डर का माहौल बनता है तो कई निवेशक जल्दबाजी में अपने शेयर बेचने लगते हैं। इससे मजबूत कंपनियों के शेयर भी नीचे आ जाते हैं। यही वह समय होता है जब धैर्य और दूरदृष्टि रखने वाले निवेशक भविष्य की संपत्ति निर्माण की नींव रखते हैं। कई अनुभवी निवेशक मानते हैं कि जब बाजार का मनोबल कमजोर हो और अच्छी कंपनियों के दाम आकर्षक हो जाएं, तब लंबी अवधि के निवेश के लिए अवसर पैदा होते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए कंपनियों का सही चयन करना आसान नहीं होता। हर निवेशक के पास बैलेंस शीट पढ़ने या उद्योग का गहन विश्लेषण करने का समय और अनुभव नहीं होता। ऐसे निवेशकों के लिए म्यूच्यूअल फंड एक व्यवहारिक विकल्प बन सकता है। जब बाजार में गिरावट आती है तो म्यूचुअल फंड की यूनिट्स भी अपेक्षाकृत सस्ती हो जाती हैं। इसका मतलब यह है कि निवेशक कम कीमत पर अच्छी कंपनियों के विविध पोर्टफोलियो में भागीदारी प्राप्त कर सकता है। साथ ही, पेशेवर फंड मैनेजर निवेश का प्रबंधन करते हैं, जिससे व्यक्तिगत चयन की अनिश्चितता और जोखिम कुछ हद तक कम हो जाता है।
दरअसल, महंगाई के दौर में सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि बचत की वास्तविक क्रयशक्ति घटने लगती है। यदि पैसा केवल निष्क्रिय रूप से पड़ा रहे तो समय के साथ उसकी कीमत कम होती जाती है। ऐसे समय में समझदारी यह होती है कि निवेश को इस तरह व्यवस्थित किया जाए कि वह महंगाई की रफ्तार से आगे निकल सके। इतिहास बताता है कि लंबी अवधि में इक्विटी और इक्विटी आधारित निवेश विकल्पों ने कई बार महंगाई को मात देकर संपत्ति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए जब दुनिया में युद्ध के बादल मंडराते हों, तेल महंगा हो रहा हो और बाजार में अनिश्चितता दिखाई दे रही हो, तब घबराने के बजाय स्थिति को समझना अधिक आवश्यक है। कई बार वही समय, जो देखने में संकट जैसा लगता है, भविष्य के वेल्थ क्रिएशन की मजबूत शुरुआत भी साबित हो सकता है। समझदारी इसी में है कि निवेशक शोर और डर से दूर रहकर दीर्घकालिक दृष्टि बनाए रखें और अवसरों को पहचानने की क्षमता विकसित करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य वित्तीय जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता का आकलन अवश्य करें।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)

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