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महाराष्ट्र में गैस के लिए जंग … अब कोटे से मिलेगा सिलेंडर! …स्कूल-अस्पताल को होगी शत प्रतिशत आपूर्ति

-होटल व उद्योगों को ७० से ५०% कोटा
– जिलाधीशों को सिलेंडर निगरानी का निर्देेश

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मध्य-पूर्व में भड़के युद्ध का असर अब महाराष्ट्र के रसोई घरों तक पहुंच गया है। राज्य में एलपीजी गैस की भारी किल्लत के बीच महायुति सरकार को आपातकालीन नियम लागू करने पड़े हैं। गैस वितरण पर सख्त नियंत्रण लगाते हुए स्कूल, अस्पताल और आवश्यक सेवाओं को शत प्रतिशत सिलेंडर देने का पैâसला किया गया है, जबकि होटल, उद्योग व अन्य क्षेत्रों की आपूर्ति ७० से ५० प्रतिशत तक सीमित कर दी गई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने सभी जिलाधीशों को सख्त निर्देश जारी कर गैस वितरण की दैनिक निगरानी और रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
राज्य में एलपीजी सिलेंडरों की भारी किल्लत के बीच गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और बुकिंग के बाद भी लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा। इस गंभीर स्थिति के बीच महायुति सरकार ने गैस वितरण को लेकर एक नई आपातकालीन नियमावली जारी कर दी है, जिसके तहत अलग-अलग क्षेत्रों के लिए गैस का कोटा तय किया गया है।
मत्स्यपालन को ५०%
महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल, औषधि उद्योग, बीज प्रसंस्करण तथा मत्स्यपालन जैसे क्षेत्रों को अधिकतम ५० प्रतिशत गैस आपूर्ति की सीमा तय की गई है। इस पैâसले से गैस पर निर्भर कई उद्योग और व्यवसायों पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
श्मशान-अनाथालय को १००% सप्लाई
सरकार के परिपत्र के अनुसार, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं को शत प्रतिशत गैस आपूर्ति दी जाएगी। इसी श्रेणी में श्मशान घाट, वृद्धाश्रम और अनाथालयों को भी शामिल किया गया है। वहीं रक्षा क्षेत्र, सरकारी व सार्वजनिक उपक्रम, रेलवे, हवाई परिवहन, पुलिस और जेल विभाग को केवल ७० प्रतिशत गैस आपूर्ति होगी।

सरकार को रोज भेजनी है रिपोर्ट!
सिलेंडर की किल्लत के बाद सभी जिलाधिकारियों को आदेश

गैस सिलेंडर की कमी को देखते हुए सरकार ने राज्य में एलपीजी पर कोटा लगा दिया है। राज्य सरकार के सहसचिव अशोक आत्राम ने सभी जिलाधिकारियों को भेजे गए परिपत्र में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने जिलों में सरकारी और अनुदानित आश्रमशालाओं, छात्रावासों, सरकारी भोजनालयों, मध्याह्न भोजन योजना, आंगनवाड़ी और शैक्षणिक संस्थानों के अंतर्गत चलने वाली रसोइयों को एलपीजी सिलेंडरों का १०० प्रतिशत आवंटन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही गैस वितरण की स्थिति पर रोजाना रिपोर्ट सरकार को भेजना भी अनिवार्य किया गया है।
संकट प्रबंधन में ही उलझी सरकार
हालांकि, विपक्ष ने इस पैâसले को लेकर महायुति सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि गैस आपूर्ति की योजना बनाने के बजाय सरकार संकट प्रबंधन में ही उलझी हुई है, जिसका खामियाजा आम नागरिकों और छोटे व्यवसायों को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल, अंतर्राष्ट्रीय हालात के चलते गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई है, लेकिन राज्य में आपूर्ति व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई शहरों में लोग सिलेंडर के लिए घंटों कतारों में खड़े हैं, जिससे सरकार की तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सरकार की नीतिगत असफलता से गैस संकट गहराया है। युद्ध बहाना बनाकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। जनता कतारों में खड़ी है और महायुति सरकार सिर्फ परिपत्र जारी कर रही है।
-सुषमा उपाध्याय, गृहिणी, ठाणे

गैस वितरण की यह नई नीति अस्थाई राहत है, समाधान नहीं। उद्योग, होटल और छोटे व्यवसाय आधी आपूर्ति पर कैसे चलेंगे? सरकार को आपूर्ति बढ़ाने की ठोस योजना तुरंत लानी चाहिए।
-नीलू दुबे, गृहिणी, नालासोपारा

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