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युद्ध लंबा चला तो आएगा विश्व पर भुखमरी का संकट! …लाखों टन यूरिया गल्फ में फंसा

– दुनिया में एक तिहाई उर्वरक खाड़ी देशों से होता है सप्लाई
– वैश्विक खेती पर पड़ेगा असर, अनाज का घटेगा उत्पादन

सामना संवाददाता / मुंबई
मध्य-पूर्व में जारी युद्ध अब दुनिया के सामने बड़े खाद्य संकट का खतरा पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष लंबा चला तो यह संकट उस खाद्य झटके से भी ज्यादा गंभीर हो सकता है जो रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले के बाद २०२२ में देखने को मिला था। मध्य-पूर्व का यह युद्ध दुनिया में भुखमरी का संकट पैदा कर सकता है।
दरअसल, इस युद्ध के कारण मध्य-पूर्व में यूरिया उत्पादन के बड़े हिस्से पर असर पड़ा है। यूरिया दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला नाइट्रोजन उर्वरक है, जो खेती और खाद्यान्न उत्पादन के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। गैस की कमी के कारण दक्षिण एशिया के कई देशों में उर्वरक कंपनियों को भी उत्पादन कम करना पड़ा है। सामान्य तौर पर पिछले दो सप्ताह में करीब २१ लाख टन यूरिया निर्यात के लिए लोड किया जाता, लेकिन मौजूदा हालात में इसका लगभग आधा हिस्सा प्रभावित हो गया है। आंकड़ों के अनुसार, करीब ११ लाख टन से ज्यादा उर्वरक और उससे जुड़े कच्चे माल अभी खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं।

नेचुरल गैस की कीमतों में उछाल से उर्वरक के बढ़ेंगे दाम!
दुनिया में गहराएगा खाद्यान का संकट

मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के चलते खेती में प्रयुक्त होनेवाले प्रमुख उर्वरक यूरिया की सप्लाई प्रभावित हुई है। खाड़ी देशों में काफी उर्वरक पोर्ट पर पड़े हुए हैं, जबकि कुछ यूरिया लदे जहाज बीच रास्ते में फंसे हुए हैं। इनमें करीब ५,७०,००० टन यूरिया भी शामिल है, जो या तो जहाजों पर लोड हो रहा है या पहले से जहाजों में पड़ा है। नाइट्रोजन उर्वरक वैश्विक खाद्य उत्पादन के लगभग आधे हिस्से की आधारशिला माने जाते हैं। इन्हें अमोनिया से तैयार किया जाता है और इसके लिए प्राकृतिक गैस की जरूरत होती है। युद्ध शुरू होने के बाद प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी उछाल आ गया है, जिससे उर्वरक उत्पादन और महंगा तथा कठिन हो गया है।
यह संकट ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तरी गोलार्ध में फसलों की बुवाई का मौसम शुरू हो रहा है।
होर्मुज से गुजरता है ४५% सल्फर
दुनिया में होने वाले यूरिया निर्यात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इसके अलावा फॉस्फेट उर्वरकों के लिए जरूरी सल्फर का लगभग ४५ प्रतिशत निर्यात भी इसी समुद्री मार्ग से होता है, जो फिलहाल युद्ध के कारण लगभग बंद हो चुका है। युद्ध के असर से कतर की प्रमुख उर्वरक कंपनी को अपने लगभग ५६ लाख टन वार्षिक क्षमता वाले यूरिया संयंत्र को बंद करना पड़ा है।
उर्वरक संयंत्रों की गैस में कटौती
हिंदुस्थान में गैस की कमी के कारण उर्वरक संयंत्रों को सामान्य खपत के लगभग ७० प्रतिशत तक गैस उपयोग करने का निर्देश दिया गया है। पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी कई संयंत्रों ने उत्पादन रोक दिया है। पाकिस्तान में देश की बड़ी उर्वरक कंपनियों में से एक ने यूरिया उत्पादन बंद कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द हालात सामान्य नहीं हुए तो इसका असर दुनिया भर की खेती पर पड़ेगा। इससे आने वाले समय में अनाज उत्पादन में गिरावट देखने को मिल सकती है। इस कारण वैश्विक स्तर पर खाद्य संकट और भुखमरी का खतरा बढ़ सकता है।

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