-सरकारी स्टॉक में ७१ हजार बोतलों का पड़ा है जखीरा
-बैन कंपनी को ‘आयरन सिरप’ का ठेका देने की तैयारी
-रु. १०० करोड़ की बंदरबांट के लिए शुरू हुआ खेल
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महाराष्ट्र की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में एक सनसनीखेज और खौफनाक खेल सामने आया है। कुपोषित बच्चों और गर्भवती माताओं के इलाज के नाम पर सप्लाई किया गया आयरन सिरप एफडीए जांच में ‘अनसेफ’ साबित हुआ है। हैरानी की बात यह है कि निकृष्ट दवा देने वाली ब्लैकलिस्ट कंपनी को फिर से लगभग १०० करोड़ रुपए का टेंडर देने की तैयारी चल रही है। रायगढ़ के सरकारी गोदामों में इस दवा की ७१ हजार बोतलों का ‘स्लो पॉयजन’ जैसा जखीरा पड़ा है।
यह सिरप पालघर की कंपनी ने सप्लाई किया था। बच्चों में एनीमिया दूर करने के लिए खरीदी गई इस दवा की ५० बैचें जांच में निकृष्ट गुणवत्ता की पाई गईं। एफडीए की रिपोर्ट में यह दवा मानव उपयोग के लिए असुरक्षित बताई गई है। सूत्रों के अनुसार, इस कंपनी को लगभग १० करोड़ रुपए का ठेका दिया गया था। खराब दवा की पुष्टि होने के बाद कंपनी को दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि महज एक महीने में ही निर्णय पलट दिया गया। पूरी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय केवल आयरन सिरप को ही सूची में डाल दिया गया।
-निकृष्ट दवा देने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर बचाया गया। बच्चों और गर्भवती महिलाओं की जान से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
-विजय कुम्भार, समाजसेवी
-महायुति सरकार की निगरानी में स्वास्थ्य विभाग का टेंडर खेल उजागर हुआ है। जिम्मेदार अधिकारियों की जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
-प्रीति उपाध्याय, ठाणे
