अनिल मिश्र / पटना
बिहार और झारखंड में एलपीजी गैस सिलेंडर की भारी किल्लत से हाहाकार मच गया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित होने और अफवाहों के चलते जमाखोरी बढ़ने से बिहार की राजधानी पटना से लेकर झारखंड की राजधानी रांची सहित कई शहरों में गैस के लिए 4–5 घंटे तक लंबी लाइनें लग रही हैं।
गैस की कमी का असर अब दैनिक जीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। कई आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों और हॉस्टलों में खाना बनना बंद हो गया है। लोग मजबूरी में लकड़ी, कोयला या इंडक्शन चूल्हों का सहारा लेने लगे हैं। गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की भीड़ उमड़ रही है और कई जगह स्टॉक खत्म होने की खबरें भी सामने आ रही हैं।
पटना में तीन हजार से अधिक हॉस्टल बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं, जिससे छात्रों को घर लौटने की नौबत आ गई है। छोटे होटल और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण उनका कारोबार भी प्रभावित हो गया है।
इस बीच बिहार के मुंगेर और झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर में अवैध रिफिलिंग और कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आई हैं। प्रशासन इन मामलों की जांच कर रहा है। गैस संकट के कारण आम लोगों को मजबूरी में पारंपरिक ईंधनों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। कई घरों में लकड़ी, घास-पुआल और कोयले के चूल्हे फिर से जलने लगे हैं।
ईरान, इजराइल और अमेरिका से जुड़े मिडिल ईस्ट क्षेत्र में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति का असर गैस सप्लाई पर भी पड़ रहा है। बिहार के गया जिले में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। कई गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
नक्सल प्रभावित इमामगंज क्षेत्र में सबसे ज्यादा भीड़ देखी गई। सुबह होते ही उपभोक्ता गैस एजेंसियों के बाहर लाइन में लग जाते हैं, लेकिन कई लोगों को घंटों इंतजार के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि होली के बाद से अचानक गैस सिलेंडर की कमी बढ़ गई है, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इमामगंज प्रखंड के बीस सूत्री अध्यक्ष संजय सिंह गैस एजेंसी पहुंचे और संचालकों को निर्देश दिया कि सिलेंडर सीधे उपभोक्ताओं को दिए जाएं और वेंडरों को आपूर्ति न की जाए, ताकि हर घर तक गैस पहुंच सके। वहीं जिला परिषद सदस्य पार्वती देवी भी गैस एजेंसी पर कतार में खड़ी दिखाई दीं। उनका कहना है कि गैस की कमी से आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है और जल्द से जल्द सप्लाई सामान्य की जानी चाहिए।
एक उपभोक्ता संजय प्रसाद ने बताया कि वह सुबह छह बजे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन अभी तक उनका नंबर नहीं आया है। कई लोगों के घरों में गैस खत्म हो चुकी है और वे काफी परेशान हैं। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में गैस की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी और उन्हें राहत मिलेगी।
उधर, ईरान से जुड़े तनाव के कारण एलपीजी सिलेंडर की कमर्शियल सप्लाई भी प्रभावित बताई जा रही है। इसका असर स्कूलों, कॉलेजों के हॉस्टलों, रेस्टोरेंट और ठेला चलाने वाले कारोबारियों पर सीधा पड़ा है।
झारखंड के पलामू जिले स्थित मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में करीब 350 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। शनिवार को यहां रात का खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं था। मेडिकल कॉलेज के छात्रावास में रोजाना करीब डेढ़ सिलेंडर की खपत होती है। गुरुवार से ही यहां गैस की समस्या शुरू हो गई है। हालात को देखते हुए कॉलेज प्रशासन वैकल्पिक साधनों पर विचार कर रहा है और गैस आपूर्ति के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजने की तैयारी कर रहा है।
इस बीच पटना में गैस एजेंसी बंद मिलने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और कुछ स्थानों पर लोगों ने सिलेंडर लेकर सड़क जाम कर दिया। कई जिलों में एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं, जबकि झारखंड के गिरिडीह में गैस एजेंसी मालिक और उपभोक्ताओं के बीच झड़प होने की भी खबर है।
बिहार और झारखंड सरकारों ने स्थिति को देखते हुए घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने, जमाखोरी रोकने और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। दोनों राज्यों की सरकारों का कहना है कि गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
झारखंड सरकार ने कमर्शियल सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है, क्योंकि इससे होटल और रेस्टोरेंट का कारोबार प्रभावित हो रहा है। वहीं प्रशासन स्थानीय स्तर पर गैस एजेंसियों के साथ मिलकर लगातार निगरानी कर रहा है, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा सके।
