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फलसफा : अनकहे रिश्ते

सना खान

कभी-कभी जिंदगी में कोई इंसान सिर्फ दोस्त बनकर आता है। शुरुआत में सब कुछ बहुत साधारण होता है- कुछ बातचीत, कुछ मुलाकातें और एक सहज-सा रिश्ता। लेकिन दिल हमेशा हिसाब से नहीं चलता। कभी-कभी वही दोस्त धीरे-धीरे दिल के थोड़ा ज्यादा करीब लगने लगता है। भावनाएं बदलने लगती हैं, पर हर एहसास दो तरफा नहीं होता। कभी एक दिल दोस्ती से आगे बढ़ जाता है और दूसरा वहीं ठहर जाता है। यहीं से रिश्तों की वह खामोशी शुरू होती है, जिसे शब्दों में कहना आसान नहीं होता। क्योंकि रिश्ते सिर्फ साथ रहने से नहीं चलते, वे सम्मान, समझ और सच्चाई से मुकम्मल होते हैं। और सच यह भी है कि हर रिश्ता मंजिल तक पहुंचे, यह जरूरी नहीं होता। कुछ रिश्ते हमें यह समझाने के लिए आते हैं कि किसी के करीब होना और किसी के लिए होना, दोनों अलग बातें हैं। कई बार हम किसी इंसान को खोते नहीं हैं, हम बस यह समझ जाते हैं कि वह हमारी कहानी का हिस्सा था, मंजिल नहीं। समय लगता है यह स्वीकार करने में कि हर सच्ची भावना को मंजिल नहीं मिलती। कुछ रिश्ते बस हमें थोड़ा और समझदार बना जाते हैं। धीरे-धीरे यह एहसास आता है कि कुछ लोग हमारी जिंदगी में साथ निभाने के लिए नहीं, बल्कि एक सीख देकर चुपचाप आगे बढ़ जाने के लिए आते हैं। और फिर वही रह जाती है एक कहानी अनकही।

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